Justice Shekhar Yadav: मेरे बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, विदाई समारोह में छलका जस्टिस शेखर का दर्द
Justice Shekhar Yadav Retirement News: जस्टिस यादव ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि मेरा कोई दोष नहीं था।
- Written By: अमन मौर्या
जस्टिस शेखर कुमार यादव (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Justice Shekhar Kumar Yadav Retirement: इलाहाबाद हाईकोर्ट के चर्चित जस्टिस शेखर कुमार यादव बुधवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस अवसर पर उनके सम्मान में विदाई समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने अपने कार्यकाल, विवादों और न्यायिक मुद्दों पर खुलकर बात की। इस दौरान उन्होनें खासतौर से उस बयान का भी जिक्र किया, जो विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में दिया था। जोकि बाद में काफी विवादों में रहा।
विवाद का जिक्र करते हुए जस्टिस यादव ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि मेरा कोई दोष नहीं था। गलती उन लोगों की थी, जिन्होंने बात को तोड़ मरोड़ कर पेश किया। इस दौरान उन्होंने बार एसोसिएशन के वकीलों द्वारा मिले समर्थन का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि अगर उस समय उन वकीलों का साथ नहीं मिलता, तो वह मानसिक रूप से टूट जाते।
VHP के कार्यक्रम में दिए भाषण पर विवाद
आपको बता दें कि, दिसंबर, 2024 को विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में उनके भाषण दिया था। इसमें उनके बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था। अपने भाषण में उन्होंने देश की मौजूदा व्यवस्था, बहुसंख्यक समाज, समान नागरिक संहिता जैसे मुख्य मुद्दों पर अपनी राय रखी थी। इसकी बाद में काफी आलोचना भी हुई थी। अपने विदाई समारोह में जस्टिस यादव ने अपने कार्यकाल के दौरान की निष्पक्षता का भी बचाव किया। उन्होनें वकीलों से कहा, कि अदालत में कभी भी उन्होंने किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया।
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युवा वकीलों के लिए खास सलाह
जस्टिस यादव ने युवा वकीलों को खास सलाह देते हुए बताया कि वकालत के पेशे में आचरण और व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि अदालत में विनम्रता, सम्मान बहुत जरूरी है। उनके अनुसार, कई बार केस की मजबूती होने के साथ वकील का व्यवहार भी परिणाम को प्रभावित कर सकता है। अपने भाषण में जस्टिस यादव ने चिंता जताई कि आज अदालतों में सीनियर वकीलों के लिए सम्मान भाव कम होता जा रहा है।
कभी सोचा नहीं था कि जज बनूंगा- जस्टिस यादव
अपने संबोधन में जस्टिस यादव अपने शुरुआती जीवन को करते हुए बताया कि उन्होनें कभी नहीं सोचा था कि आगे चलकर वो हाईकोर्ट के जज बनेंगे। एक समय ऐसा भी था जब वो साइकल से सफर करते थे।
