

Highlights:
भाजपा की अंदरूनी सियासत के बीच 4 नवम्बर को गोरखपुर आएंगे नितिन नवीन
देवेंद्र की भूमिका से राधा मोहन की पोस्ट तक..राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर
शिक्षक एमएलसी चुनाव में पार्टी के भीतर उभरे मतभेदों ने बढ़ाई थीं चर्चाएं
दौरे से पहले पंकज चौधरी ने संभाला मोर्चा
Nitin Nabin Gorakhpur Visit: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा ने पूर्वांचल में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। चार नवंबर को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का गोरखपुर दौरा इसी रणनीति का हिस्सा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद में उनके आगमन को केवल चुनावी तैयारियों से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में गोरखपुर भाजपा के भीतर सामने आए घटनाक्रमों के कारण इस दौरे के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
गोरखपुर में भाजपा की अंदरूनी राजनीति तब चर्चा में आई, जब शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान पार्टी के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के समर्थन में सार्वजनिक रूप से अपनी भूमिका निभाई। एक तरफ भाजपा अपने प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी की जीत के लिए जुटी थी, वहीं पार्टी के मौजूदा एमएलसी का विपक्षी प्रत्याशी के पक्ष में खड़ा होना संगठन के लिए असहज स्थिति बन गया। चुनाव के बाद भी इसे लेकर अनुशासन और आपसी तालमेल पर चर्चाएं होती रहीं।
इसी बीच राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल की सोशल मीडिया पोस्ट ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ाई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की छाते वाली तस्वीर साझा कर उनकी सादगी और आत्मनिर्भरता की तारीफ की गई। पोस्ट में किसी नेता पर सीधी टिप्पणी नहीं थी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले गए।
नितिन नवीन के आगमन से पहले प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी गोरखपुर पहुंचे। उन्होंने क्षेत्रीय कार्यालय में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन में समन्वय और एकजुटता पर जोर दिया गया।
चार नवंबर को प्रस्तावित पदयात्रा और युवा संवाद के अलावा पांच नवंबर को संगठन के विभिन्न स्तरों के नेताओं के साथ बैठकें होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पंकज चौधरी और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े की मौजूदगी में राष्ट्रीय नेतृत्व पूर्वांचल में संगठन की सक्रियता और चुनावी तैयारियों का आकलन करेगा।
गोरखपुर से निकलने वाला राजनीतिक संदेश पूर्वांचल की दूसरी सीटों तक भी पहुंचता है। ऐसे में दौरे की सफलता केवल भीड़ और कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि नेताओं के बीच समन्वय से भी आंकी जाएगी। शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान सामने आए मतभेदों के बीच पार्टी के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है।
गोरखपुर की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रभाव निर्विवाद माना जाता है। इसके बावजूद प्रदेश की राजनीति में दिल्ली बनाम लखनऊ और योगी बनाम केंद्रीय नेतृत्व की चर्चाएं समय-समय पर उठती रही हैं। ऐसे माहौल में नितिन नवीन का दो दिवसीय प्रवास महत्वपूर्ण है। योगी आदित्यनाथ, पंकज चौधरी और विनोद तावड़े की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रमों से राष्ट्रीय नेतृत्व संगठनात्मक एकजुटता का संदेश देने के साथ 2027 की तैयारियों को भी परखना चाहेगा।
रिपोर्ट- अनुराग मिश्रा