

जिलाध्यक्ष के साधु यादव पर भाजपा विधायक से मिलीभगत का आरोप
फेसबुक पोस्ट हटते ही सोशल मीडिया पर जिलाध्यक्ष के खिलाफ उठे सवाल
18 नवंबर को अखिलेश का दौरा, सपा की अंदरूनी कलह बनी चुनौती
Akhilesh Yadav Gorakhpur Visit: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के भीतर गोरखपुर में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद और पूर्वांचल की राजनीति के महत्वपूर्ण केंद्र गोरखपुर में सपा की अंदरूनी कलह अब सोशल मीडिया पर भी दिखाई देने लगी है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर आपसी खींचतान गहराने के संकेत मिल रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में सपा जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम का नाम चर्चा में है, हालांकि अभी इस पूरे घटनाक्रम पर सपा के नेता बोलने से बचते हुए नजर आ रहे हैं।
दरअसल, बीते दिनों सपा जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम की फेसबुक आईडी से एक पोस्ट साझा की गई थी। इसमें कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र के सपा नेता साधु यादव पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। पोस्ट में साधु यादव को भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह से मिला हुआ बताया गया था। साथ ही जिलाध्यक्ष को अपमानित करने की बात भी कही गई थी। हालांकि, कुछ समय बाद इस पोस्ट को हटा दिया गया।
पोस्ट हटने के बाद पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आने लगी। कई सपा समर्थकों और पार्टी से जुड़े लोगों ने जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम के खिलाफ पोस्ट लिखीं।
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने बृजेश गौतम के बसपा से सपा में आने का जिक्र करते हुए पार्टी के पुराने नेताओं को प्रमाणपत्र देने से बचने की नसीहत दी। वहीं, कुछ पोस्ट में विरासत गलियारे के दौरान सपा नेता माता प्रसाद पांडेय की गाड़ी का शीशा टूटने की घटना को लेकर भी जिलाध्यक्ष पर सवाल उठाए गए।
इस तरह पार्टी के अंदर नेताओं के बीच चल रही नाराजगी अब सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन गई है। हालांकि, इस पूरे विवाद पर जिलाध्यक्ष या पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस घटनाक्रम के बीच 18 नवंबर को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का चौरीचौरा में कार्यक्रम प्रस्तावित है। उनके गोरखपुर दौरे से ठीक पहले पार्टी में सामने आई नाराजगी शीर्ष नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकती है।
गोरखपुर पूर्वांचल की राजनीति में अहम स्थान रखता है और 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा के लिए भी यह जिला महत्वपूर्ण है। ऐसे में पार्टी के भीतर की खींचतान चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकती है।
अब सवाल उठ रहा है कि क्या अखिलेश यादव के दौरे से पहले गोरखपुर में सपा कोई बड़ा सांगठनिक बदलाव करेगी? क्या पार्टी नेतृत्व इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई कदम उठाएगा? फिलहाल सबकी निगाहें अखिलेश यादव और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हैं।