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आम महोत्सव में छाया ढाई लाख रुपये किलो का आम, चार दर्जन से अधिक प्रजातियों ने खींचा लोगों का ध्यान

Gorakhpur Mango Festival: गोरखपुर में आम महोत्सव में 4 दर्जन से अधिक प्रजातियों के आमों की प्रदर्शनी लगाई गई। जापानी प्रजाति के ढाई लाख रुपये प्रति किलो मियाजाकी आम ने सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा

  • Written By: स्निग्धा श्रीवास्तव
Updated On: Jun 22, 2026 | 02:35 PM

आम महोत्सव (सोर्स- फोटो नवभारत)

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 Farmers Exhibition Gorakhpur Mango Festival: क्या आपको पता है कि गोरखपुर और आसपास के जिलों में ऐसे किसान भी हैं, जिनका पेशा खेती नहीं, बल्कि शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक जीवन है, लेकिन उनका दिल आज भी अपने पुश्तैनी आम के बागों में बसता है। और क्या आप यकीन करेंगे कि एक ही पंडाल के नीचे चार दर्जन से ज्यादा प्रजातियों के आमों की ऐसी महफिल सजी, जहां स्वाद, रंग, आकार और कीमत—सब कुछ लोगों को हैरान कर रहा था। आज हम आपको बताते हैं गोरखपुर के एक अनोखे आम महोत्सव के बारें में

आम उत्पादक किसानों ने किया बेहतरीन प्रजातियों का प्रदर्शन

गोरखपुर महानगर के एक विशाल क्लब में आयोजित इस आम महोत्सव में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आए आम उत्पादक किसानों ने अपनी बेहतरीन प्रजातियों का प्रदर्शन किया। यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा और अमरपाली जैसी पारंपरिक किस्मों के साथ-साथ कई दुर्लभ और विदेशी प्रजातियों के आम भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। इसी प्रदर्शनी में जापानी प्रजाति का एक ऐसा आम “मियाजाकी” जिसकी कीमत तकरीबन ढाई लाख रुपये प्रति किलो है।

चर्चा में रही आमों की कीमत

सबसे खास बात यह रही कि प्रदर्शनी में शामिल अधिकांश उत्पादकों का मूल व्यवसाय खेती नहीं था। कोई सेवानिवृत्त वैज्ञानिक था, कोई चिकित्सक परिवार से जुड़ा था, तो कोई अन्य पेशे में स्थापित होने के बावजूद अपनी पुश्तैनी बागवानी को जीवित रखे हुए है। इस प्रदर्शनी में आमों की कीमत भी चर्चा का विषय रही।

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कुछ आम जहां 100 से 150 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध थे, वहीं एक दुर्लभ प्रजाति का आम ढाई लाख रुपये प्रति किलो तक की कीमत के साथ प्रदर्शित किया गया। यह आम देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही और लोग इसकी विशेषताओं को जानने के लिए उत्सुक दिखाई दिए।

पुश्तैनी आमों की पहचान को बचाए रखना बेहद जरूरी

गोरखपुर विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय से सेवानिवृत्त डॉ. शिव शरण दास का मानना है कि विदेशी प्रजातियों की चमक-दमक के बीच स्थानीय और पुश्तैनी आमों की पहचान को बचाए रखना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार स्थानीय प्रजातियां हमारे मौसम और मिट्टी के अनुकूल होने के कारण स्वाद और गुणवत्ता दोनों में बेहतर साबित होती हैं।

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राजनीति और सामाजिक जीवन में सक्रिय डॉ. तलत अजीज भी इस महोत्सव में अपने स्टॉल के साथ मौजूद थीं। उनके स्टॉल पर प्रदर्शित ढाई लाख रुपये किलो वाला आम लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना रहा। उनका कहना है कि आम की खेती केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि प्रकृति और परंपरा से जुड़े रहने का माध्यम भी है।

तीन हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार किए जाते हैं करीब बीस प्रजातियों के आम

महाराजगंज से आए एक आम उत्पादक ने बताया कि उनके तीन हेक्टेयर क्षेत्र में करीब बीस प्रजातियों के आम तैयार किए जाते हैं। प्रदर्शनी में वे दस से बारह प्रजातियों के आम लेकर पहुंचे थे, जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया। आम को लेकर फैली कई भ्रांतियों के बीच किसानों ने यह भी बताया कि मौसम के अनुसार तैयार हुए प्राकृतिक आम स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं होते। जरूरत केवल संतुलित मात्रा में सेवन करने की है।

आम से बने विभिन्न उत्पादों की खुली बिक्री

आम महोत्सव के संयोजक अचिंत्य लहरी के अनुसार कार्यक्रम को दो सत्रों में आयोजित किया गया था। पहले सत्र में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। जबकि दूसरे सत्र में आम, आम के पौधों और आम से बने विभिन्न उत्पादों की खुली बिक्री की गई।

कार्यक्रम के समापन सत्र की मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफ पूनम टंडन ने विजेता कृषकों को सर्टिफिकेट देकर उनका हौसला बढ़ाया। चार दर्जन से अधिक प्रजातियां, हजारों तरह के स्वाद, पुश्तैनी बागों से जुड़ी कहानियां और ढाई लाख रुपये किलो तक का आम गोरखपुर का यह आम महोत्सव केवल फलों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि पूर्वांचल की कृषि विरासत, जैव विविधता और किसानों के समर्पण का उत्सव बन गया।

Gorakhpur mango festival showcases 2 5 lakh per kg miyazaki 4dozen varieties

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Published On: Jun 22, 2026 | 02:33 PM

Topics:  

  • Gorakhpur
  • Mango Season

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