

Ghazipur Neha Vishwakarma Case Politics: उत्तर प्रदेश में गाजीपुर की घटना पर प्रदेश में सियासत गर्मा गई है। घटना पर प्रदेश की योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने 29 अप्रैल को गाजीपुर जाने का ऐलान कर दिया है। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी मामले पर प्रदेश की योगी सरकार पर जमकर हमला बोला है। घटना पर दोनो नेताओं ने अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राज्य की योगी सरकार के कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
बताया जा रहा है कि इस घटना की तुलना हाथरस वाली घटना से की जाने लगी और इसे अगड़ा-बनाम पिछड़ा की लड़ाई बनाने की कोशिश हो रही है। बता दें कि नाबालिक नेहा विश्वकर्मा 14 अप्रैल की देर रात अपने घर से गायब हो गई।
मामला सामने आने के बाद घटना को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। भीमा आर्मी, सपा आदि दलों के जिला लेवल का एक प्रतिनिधिमंडल 20 अप्रैल को एसपी और डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने थाने के इंस्पेक्टर को हटाने की भी मांग की। इस बीच सपा मुखिया अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और गाजीपुर में 11 सदस्यीय सपा का प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा कर दी। समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के 22 अप्रैल को कटरिया गांव पहुंचाने पर गांव में बवाल हो गया।
घटना पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, वर्चस्ववादी कब समझेंगे गरीब के जीवन का भी महत्व होता है। किसी की भी जान की कीमत कभी पैसा नहीं हो सकता। इस बात की जांच हो कि भाजपा के ये कौन लोग हैं जो समझाने के नाम पर दबाव बना रहे हैं और वो भी पुलिस की साक्षात उपस्थिति में। इसकी भी जांच हो कि हत्या के मामले में कौन पुलिसवाले सक्रिय होकर पीड़ित पक्ष को एक तरह से धमका रहे हैं और पीड़ित पक्ष का साथ देनेवालों पर ही झूठे मुकदमे लगा रहे हैं। ये घोर अत्याचार है। इस तरह से पीडीए समाज की एक जान के बदले पैसे देने की सौदेबाजी एक हत्या के बाद एक और मानसिक हत्या है। न्याय हो!
घटना के बाद 24 अप्रैल को सपा मुखिया अखिलेश यादव ने एक प्रेस-कॉन्फ्रेंस करके इसे एक सामंतवादी घटना करार दिया। साथ ही उन्होंने 29 अप्रैल को गाजीपुर जाने की भी घोषणा कर दी। अखिलेश यादव के इस ऐलान के बाद प्रशासनिक विभाग में हड़कंप मच गया। पुलिस विभाग भी एक्टिव मोड में आ गया। आईजी वाराणसी पीयूष मोरडिया और डीआईजी वाराणसी वैभव कृष्ण पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की बात कही। साथ ही सभी दोषियों को सख्त सजा दिलाने का आश्वासन दिया।
प्रियंका गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए एक्स पर पोस्ट किया। प्रियंका लिखती ने पोस्ट में लिखा, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश में एक लड़की की हत्या के मामले में पहले केस दर्ज होने में आनाकानी, फिर पीड़ित परिवार को धमकियां मिलना और दबंगों द्वारा अराजकता फैलाना यह दिखाता कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार चरम पर है। भाजपा राज में अब यही अघोषित कानून बन गया है कि जब भी किसी महिला पर अत्याचार होता है तो पीड़ित को ही और प्रताड़ित किया जाता है।
महिलाओं को लेकर प्रधानमंत्री जी की बड़ी-बड़ी बातें सिर्फ दिखावा हैं। उन्नाव हो, हाथरस हो, प्रयागराज हो या गाजीपुर, जहां भी महिलाओं के साथ अन्याय हुआ, भाजपा अपनी पूरी सत्ता के साथ पीड़िता के खिलाफ, अत्याचारी के साथ खड़ी हो गई। देश भर की महिलाएं ये अंधेरगर्दी देख रही हैं।
घटना पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी एक्स पर पोस्ट आया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में विश्वकर्मा समाज की एक बेटी के साथ बलात्कार और निर्मम हत्या और फिर परिवार को FIR दर्ज कराने से रोकने के लिए धमकियां, हिंसा। हाथरस, कठुआ, उन्नाव और आज गाजीपुर यह एक पैटर्न है। मणिपुर की बेटी ने न्याय की राह देखते-देखते दम तोड़ दिया। हर बार वही चेहरा - पीड़िता दलित, पिछड़ी, आदिवासी, गरीब। हर बार वही सच्चाई - अपराधी को संरक्षण, पीड़ित को प्रताड़ना। हर बार वही चुप्पी - सत्ता की, जिन्हें बोलना चाहिए था।
जिस देश और प्रदेश में मां-बाप को अपनी बेटी की FIR लिखवाने के लिए भीख मांगनी पड़े, उस देश की सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं। दोषी पुलिस अफसरों पर कार्रवाई हो, परिवार को सुरक्षा मिले। उच्च स्तरीय जांच हो और तुरंत न्याय मिले। मोदी जी, मुख्यमंत्री जी जवाब दीजिए - आपके राज में बेटियां इतनी असुरक्षित क्यों हैं? ऐसे हालात में न्याय मांगा नहीं, छीना जाता है - और हम छीनकर लाएंगे।