

Raja Bhaiya Zia Ul Haq Case: प्रतापगढ़ के कुंडा में चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में विधायक राजा भैया को राहत मिली है। लखनऊ सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया सहित पांच लोगों को राहत दी है। इनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
बता दें, इस प्रकरण में दिवंगत सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने सीबीआई की पहली क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था। साथ ही इस हत्याकांड में सभी आरोपियों की भूमिका पर दोबारा जांच की मांग भी की थी।
सीबीआई की स्पेशल न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह ने मामले में पर्याप्त कारण न होने का हवाला दिया और विधायक राजा भैया, उनके मीडिया प्रभारी हरिओम श्रीवास्तव, गुड्डू सिंह, रोहित सिंह और सपा नेता गुलशन यादव पर आगे की कार्यवाही समाप्त कर दिया। मामले में दिवंगत सीओ की पत्नी परवीन आजाद विशेष कोर्ट में काेई मौखिक या लिखित साक्ष्य नहीं दे पाईं, जिससे कि सभी आरोपियों पर दोष सिद्ध हो सके।
सीबीआई की विशेष कोर्ट का फैसला आने के बाद शनिवार देर शाम राजा भैया का बयान सामने आया। उन्होंने कहा, सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता। कोर्ट के फैसले के बाद से राजा भैया के समर्थकों और जनसत्ता दल के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में खुशी का माहौल है।
जनसत्ता दल के नेता और बाबागंज विकास खंड के पूर्व ब्लॉक प्रमुख हितेश प्रताप सिंह ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि सीबीआई से पहले भी क्लीनचिट मिल चुकी थी। अब दोबारा क्लीनचिट मिलने से समर्थकों में हर्ष का माहौल है।
कोर्ट से क्लीन चिट मिलने पर जनसत्ता दल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बाबागंज से विधायक विनोद सरोज, पंकज सिंह, विनोद यादव, कुंडा ब्लॉक प्रमुख के प्रतिनिधि संतोष सिंह, प्रतापगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि कुलदीप पटेल, हर्षवर्धन सिंह, पंकज यादव ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
मामला 2 मार्च, 2013 का है। कुंडा के हथिगवां थाना क्षेत्र स्थित बलीपुर के ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद तत्कालीन सीओ जियाउल हक मौके पर गांव पहुंचे थे, जहां जियाउल हक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस हत्याकांड में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 9 अक्तूबर, 2024 को 10 आरोपियों को (घनश्याम सरोज, रामलखन गौतम, फूलचंद यादव, पवन यादव, मंजीत यादव, छोटेलाल यादव, राम आसरे, जगत बहादुर पटेल, पन्नालाल पटेल और शिवराम पासी) दोषी करार दिया। कोर्ट ने इन आरोपियों को जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
वहीं, सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने इस मामले में पहले दाखिल सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर विरोध किया था। विधायक राजा भैया समेत अन्य नामजद लोगों की भूमिका को लेकर उन्होंने दोबारा जांच की मांग की थी। मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अक्तूबर, 2023 में सीबीआई ने दोबारा मामले की जांच शुरू की थी। हत्याकांड में राजा भैया की भूमिका पर फिर से जांच की गई। जांच के बाद सीबीआई ने कोर्ट में दिसंबर, 2023 में फिर से क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।