विदेशी बाजारों में पहुंचेगी यूपी के सीतापुर की दरी, फिजी, पनामा से मिले आर्डर

Carpet Reach Foreign Markets: यूपी सरकार ने सीतापुर के खैराबाद, बिसंवा और लहरपुर कस्बों में असंगठित रूप से फैले दरी कारोबार को स्थापित करने के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर और डाइंग सेंटर की स्थापना की है।
Sitapur rugs high demand in abroad
सीतापुर की दरी, जिसकी भारी मांग विदेशों में है (सोर्स : सोशल मीडिया )
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Highlights:

  • ओडीओपी योजना में सीतापुर की दरी शामिल

  • फिजी, पनामा, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका के बाजारों में बिकेंगी

  • 352 बुनकरों को अब तक प्रशिक्षण दिया जा चुका है

Sitapur Rugs High Demand Abroad :अंग्रेजी हुकूमत से भी पहले से सरसब्ज उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के दरी उद्योग को अब विदेशी बाजार मिलेगा. भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा अब सीतापुर में तैयार हो रही दरी फिजी, पनामा, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका के बाजारों में बिकेंगी.

कभी घरों में इस्तेमाल होने वाली दरी बनाने वाले सीतापुर के बुनकर इन दिनों योगा मैट, बेडसाइड रनर और सेंटर टेबर रनर जैसे उत्पाद बनाकर विदेशो में भी भेज रहे हैं. सूती और ऊनी दरियों से भी आगे बढ़कर सीतापुर के खैराबाद कस्बे में बुनकर कालीन और गलीचे भी बनाने लगे हैं. जिले के खैराबाद, बिसंवा और लहरपुर कस्बों में असंगठित रूप से फैले दरी के कारोबार को नए जमाने के मुताबिक ढालने की नीयत से कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) और डाइंग सेंटर की स्थापना की है. वहीं दरी उद्योग से महिलाओं को जोड़ते हुए इसे बाजार तक पहुंचाने के लिए कारपोरेट भी आगे आए हैं।

फिजी, पनामा और सऊदी अरब से मिला आर्डर

अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में सीतापुर में आयोजित बायर-सेलर मीट के दौरान नौ  देशों के खरीदार यहां की दरियों को परखने-जांचने के लिए पहुंचे. इनमें से फिजी, पनामा और सऊदी अरब के खरीदारों ने तो मौके पर ही दरियों की खरीद के आर्डर भी दिए जबकि कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने सैंपल लिए और बाद में सौदे की बात कही है। सीतापुर में हुए बायर-सेलर मीट में विदेशी खरीदारों के अलावा हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के भी थोक व फुटकर कारोबारी पहुंचे थे।

एक जिला एक उत्पाद से मिली पहचान

एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में सीतापुर की दरी को शामिल किया गया है।ओडीओपी में आने के बाद सीतापुर की दरी के कारीगरों के लिए बिसवां में कामन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनाया गया है। करीब 2.25 करोड़ रुपये की लागत से बन कर तैयार इस सीएफसी से न केवल दरी उद्योग के लिए कच्चा माल मिलने लगा बल्कि इसकी डिजायनिंग और तैयार माल की बिक्री में भी बुनकरों को मदद मिल रही है।

ओडीओपी के तहत दो सालों में सीतापुर के 352 बुनकरों को अब तक प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। इस साल 200 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

दो सालों में दरी का सलाना टर्नओवर दोगुना हुआ

बुनकरो को 25 लाख तक के कर्ज पर 25 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है जबकि 25 से 50 लाख तक के कर्ज पर 20 फीसदी सहायता दी जा रही है। हालांकि बीते साल एक करोड़ रुपये सब्सिडी के मद में दिए गए जबकि इस साल दो करोड़ रुपये का लक्ष्य है।

सीतापुर से बीते दो सालों में ही दरी का सलाना टर्नओवर दोगुना हो गया है. 2021-22 में जहां दरी उद्योग का सलाना टर्नओवर 150-200 करोड़ रूपये था वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 400 करोड़ रूपये के पार निकल गया।इस साल दरी का कारोबार रिकॉर्ड 1000 करोड़ रूपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

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अभी भी हथकरघे पर ही बुनाई होती है

सीतापुर में 30,000 से ज्यादा परिवार दरी की बुनाई के धंधे से जुड़े हैं। दरी कारोबारियों का कहना है कि अभी भी 80 फीसदी लोग हथकरघे पर दरी की बुनाई करते हैं जबकि 20 फीसदी बड़े कारोबारियों नें पावरलूम लगा लिया है। नामचीन बुनकर राजा अंसारी बताते हैं कि सीतापुर में 20 रूपये प्रति वर्ग फुट से लेकर 300 रूपये प्रति वर्ग फुट तक की कीमत वाली दरियां तैयार की जाती हैं। हाथ की गहन बुनाई वाली ऊन की दरियां व गलीचे सबसे मंहगे हैं तो सूती दरियों की कीमत कम होती है। योगा मैट 60 रूपये से शुरू होकर 500 रूपये तक मिल जाती हैं। इसी तरह हथकरघे पर तैयार बेडरनर महंगा तो पॉवरलूम पर बनने वाला सस्ता बिकता है।

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अंग्रेजी हुकूमत के पहले से ही गुलजार है यह उद्योग

सीतापुर में दरी उद्योग 200 साल से भी ज्यादा पुराना है। ईस्ट इंडिया कंपनी ने 17 वीं व 18 वीं सदी में खैराबाद व दरियाबाग में हथकरघा निर्यात केंद्र खोले थे। बाद के दिनों में बुनकरों की तादाद बढ़ी, काम फैला और सीतापुर की दरी आम लोगों को भी आसानी से कम दामों पर मिलने लगी।हाल के वर्षों में तराई क्षेत्र में कपास की खेती खत्म हो गयी तो बुनकर सूती दरी के लिए कच्चा माल गुजरात, महाराष्ट्र से और ऊन पंजाब से मंगाते हैं।