

Mayavati On Umashankar Singh's Death: उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए एक युग का अंत हो गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से न केवल पार्टी समर्थकों में, बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई है। बसपा प्रमुख मायावती ने इस दुखद घड़ी में लखनऊ स्थित उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और दिवंगत नेता के परिवार को ढांढस बंधाया।
विधायक उमाशंकर सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित करते समय बसपा सुप्रीमो मायावती काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने उमाशंकर सिंह को अपना भाई बताते हुए कहा कि वह उन्हें सगी बहन की तरह मानते थे। मायावती ने उनकी वफादारी की सराहना करते हुए कहा कि राजनीति के मुश्किल दौर में जब बहुत से लोग स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़कर चले गए, उमाशंकर सिंह अंत तक बसपा के सिद्धांतों के साथ मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "उमाशंकर ने कभी पार्टी को धोखा नहीं दिया"।
उमाशंकर सिंह पिछले काफी समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनका इलाज दिल्ली शहर के फोर्टिस अस्पताल में चल रहा था, जहां बुधवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। वह बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक थे और सदन में बसपा का अकेले प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उनके निधन को पार्टी के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है जिसकी भरपाई करना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।
उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर संघर्ष और जनसेवा की एक प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी।
1990: वह बलिया के सतीश चंद्र डिग्री कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए।
2000: उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित होकर स्थानीय राजनीति में अपनी धाक जमाई।
2011: उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
2012: वह पहली बार रसड़ा विधानसभा से विधायक बने और तब से लगातार इस क्षेत्र का चेहरा बने रहे।
उमाशंकर सिंह केवल एक विधायक नहीं थे, बल्कि पूर्वांचल में बसपा का सबसे मजबूत चेहरा थे। पार्टी संगठन के विस्तार में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही और चुनाव के दौरान उन पर बड़ी जिम्मेदारियां होती थीं। वह आम जनता के बीच काफी लोकप्रिय थे क्योंकि वह सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों से जुड़े मुद्दों को सदन में मुखरता से उठाते थे।
उमाशंकर सिंह के निधन के बाद अब उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। मायावती ने स्पष्ट किया है कि बसपा इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि परिवार की इच्छा होगी, तो उमाशंकर सिंह के बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाया जाएगा। मायावती ने कहा कि उनके बेटे को पार्टी में वही सम्मान और स्थान दिया जाएगा जो उनके पिता को मिलता था।