बृजभूषण शरण सिंह का विवादित बयान… देश में मुसलमान और सवर्ण ही हैं दो 'खलनायक'

Controversial Political Remarks: भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने रामनवमी पर बिहार में विवादित बयान देते हुए मुसलमानों और सवर्णों को देश का खलनायक बताया और राजनीतिक दलों पर तीखा प्रहार किया।
Brijbhushan Sharan Singh's Controversial Statement: Muslims and Savarnas are India's Villains
भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Brij Bhushan Singh Statement On Savarnas: भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बिहार के बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक अत्यंत विवादित बयान दिया है। रामनवमी के पावन अवसर पर उन्होंने मंच से संबोधित करते हुए देश की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर टिप्पणी की। भारत में राजनीतिक विवादित खबरों के बीच उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। बृजभूषण सिंह का सवर्णों पर बयान ने कई राजनीतिक दलों और विशेष रूप से उनकी अपनी पूर्व पार्टी भाजपा के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर दी है।

खलनायक की परिभाषा

बृजभूषण शरण सिंह ने खुले मंच से घोषणा की कि आज इस देश के अंदर केवल दो ही खलनायक मौजूद हैं। उनके अनुसार पहला खलनायक मुसलमान है और दूसरा इस समय सवर्ण समाज स्वयं को इसी श्रेणी में पा रहा है। उनका यह बयान बहुत ही तीखा था और उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह बात लोगों को अंदर तक गहरी चोट पहुंचाएगी।

राजनीतिक दलों पर प्रहार

पूर्व सांसद ने अपने तर्क का समर्थन करते हुए कहा कि मुसलमानों का साथ देने के लिए भाजपा को छोड़कर लगभग सभी पार्टियां खड़ी हैं। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि सवर्णों के हक और उनके समर्थन में आज देश की कौन सी राजनीतिक पार्टी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने इशारों-इशारों में यूजीसी बिल को लेकर भी केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा और अपनी नाराजगी व्यक्त की।

सवर्णों की स्थिति

कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने भीड़ से पूछा कि सवर्णों के साथ कौन सा दल खड़ा है तो वहां मौजूद लोगों ने कहा 'कोई नहीं'। इस पर बृजभूषण ने जोर देकर कहा कि इसी कारण से सवर्ण आज की राजनीति में खलनायक बन कर रह गए हैं। उन्होंने एक शेर पढ़ते हुए सवर्णों की मौजूदा हालत को गहरे घावों और दोस्ती के धोखे से जोड़कर प्रस्तुत किया।

राम का समावेशी मार्ग

बृजभूषण ने लोगों से अपील की कि उन्हें अब अपनी शर्म छोड़नी होगी और खुद के लिए आगे बढ़ने का रास्ता बनाना होगा। उन्होंने भगवान श्री राम के समावेशी मार्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह राम ने सभी को जोड़ा था वैसे ही सबको साथ चलना होगा। उन्होंने ऋषि भारद्वाज, आदिवासियों, केवट और वनवासियों को साथ लेने की राम की नीति को अपनाने का पुरजोर आह्वान किया।

एकजुट होने की अपील

पूर्व सांसद ने कहा कि उनके पूर्वजों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत कुछ छोड़ा है और अब सवर्णों को एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने उन सभी लोगों को साथ लेने की बात कही जो उनके साथ चलने के लिए तैयार हैं ताकि समाज में बदलाव आ सके। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे उत्तर प्रदेश और बिहार में राजपूत समुदायों के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं।

विवादों से नाता

बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक करियर हमेशा से ही विवादों और सुर्खियों के बीच रहा है चाहे वह खेल संघ हो या राजनीति। कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहते हुए उन पर महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के कारण भी वे लंबे समय तक चर्चा में रहे थे। उनके ताजा बयानों ने एक बार फिर उन्हें राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियों के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।

चुनावी विमर्श

बिहार के बाढ़ इलाके में दिया गया यह भाषण अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर वोट बैंक पर चोट की है। सवर्णों की उपेक्षा का मुद्दा उठाकर उन्होंने आगामी चुनावों से पहले एक नया विमर्श पैदा करने की कोशिश की है। उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच अब इस बयान के निहितार्थों को लेकर तीखी बहस सोशल मीडिया पर जारी है।

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