राम मंदिर ट्रस्ट की महाबैठक कल: चढ़ावा चोरी मामले में खुलेंगे कई बड़े राज, चंपत राय पर भी होगा फैसला

Champat Rai Resignation: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बीच 6 जुलाई को ट्रस्ट की बड़ी बैठक। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे, SIT की अंतरिम रिपोर्ट और नए प्रशासनिक ढांचे पर होगी अहम चर्चा।
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राम मंदिर अयोध्या (सोर्स -सोशल मीडिया)
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Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या के राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले में 6 जुलाई को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट, वित्त वर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट, मंदिर के वित्तीय प्रबंधन और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तथा ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब आगे की प्रक्रिया क्या होगी। ट्रस्ट डीड में ट्रस्टियों के इस्तीफे, पद से हटाने और उत्तराधिकार की स्पष्ट व्यवस्था दी गई है।

इस्तीफे के बाद आगे क्या होगी प्रक्रिया?

नियमों के अनुसार, कोई भी ट्रस्टी एक महीने का पूर्व नोटिस देकर अपना इस्तीफा दे सकता है। वहीं यदि किसी ट्रस्टी पर ट्रस्ट के हितों के खिलाफ कार्य करने का आरोप हो तो बोर्ड ऑफ ट्रस्टी दो-तिहाई बहुमत से उसे पद से हटा सकता है। हालांकि ऐसा निर्णय लेने से पहले संबंधित ट्रस्टी को कारण बताओ नोटिस जारी करना, जवाब लेने और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होगा।

सोमवार की बैठक क्यों है अहम?

सोमवार को होने वाली बैठक केवल इस्तीफों पर विचार तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें मंदिर के प्रशासनिक ढांचे और भविष्य की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा होगी। चंपत राय ट्रस्ट के महासचिव के रूप में मंदिर के दैनिक संचालन और प्रशासनिक कार्यों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यदि उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाता है तो नए महासचिव की नियुक्ति भी प्रमुख मुद्दा होगी।

ट्रस्ट में किसके पास है मतदान का अधिकार?

ट्रस्ट डीड के अनुसार, बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में कुल 11 सदस्य ऐसे हैं जिन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त है। इनमें निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधि महंत दिनेन्द्र दास भी शामिल हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ट्रस्ट में स्थान दिया गया था।

मतदान अधिकार रखने वाले प्रमुख ट्रस्टियों में के. परासरन (संस्थापक ट्रस्टी), महंत नृत्यगोपाल दास, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ, परमानंद जी महाराज, स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज (कोषाध्यक्ष), विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्रा, डॉ. अनिल मिश्रा, चंपत राय और कृष्ण मोहन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, अयोध्या के जिलाधिकारी तथा मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा भी ट्रस्ट से जुड़े हैं, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं है।

ट्रस्टियों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक चढ़ावे की गणना से जुड़े आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ट्रस्टियों की भी प्रशासनिक जवाबदेही बनती है।

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