

संतों के साथ मुख्यमंत्री ने खींचा प्रभु श्रीराम रथ
आकाश से पुष्पवर्षा, भजनों की गूंज और शंखनाद
दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास से वातावरण अलौकिक
Tenth Grand Deepotsav Ayodhya : अयोध्या के सरयू तट के समीप पुष्पक विमान रूपी हेलीकाप्टर से प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के स्वरूप उतरे तो स्वागत के लिए सीएम योगी हाथ जोड़े खड़े थे। प्रभु श्रीराम के आगमन के साथ ही श्रद्धालुओं के जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा मैदान गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम को माला पहनाकर और तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया।
आस्था का ऐसा ज्वार उमड़ा कि हर ओर रामभक्ति की लहर दिखाई देने लगी। हाथों में फूल, आंखों में श्रद्धा और होठों पर जय श्रीराम, सरयू तट का यह दृश्य मानो त्रेतायुग की स्मृतियों को सजीव कर रहा था। दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास से वातावरण अलौकिक हो उठा।
प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के स्वरूप रथ पर विराजमान हुए तो रामभक्ति का अनुपम दृश्य सामने आया। सीएम योगी संतों के साथ आगे बढ़े और अपने हाथों से रामरथ खींचा। रथ आगे बढ़ा तो श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। आकाश से पुष्पवर्षा हुई तो फूलों से सजा रामरथ और उसके ऊपर बरसते पुष्पों ने वातावरण को और दिव्य बना दिया।
भजनों की मधुर स्वर लहरियां, शंखनाद और जय श्रीराम के नारों से पूरा मैदान गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री ने संतों के साथ रामरथ खींचा।
रामरथ के आगे बढ़ने के साथ ही रामकथा पार्क और आसपास का परिसर राममय हो उठा। भजनों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं की आवाज एक साथ उठती तो जय श्रीराम का उद्घोष दूर तक सुनाई देता। आकाश से बरसते फूल, प्रभु के दर्शन को आतुर श्रद्धालु और रामभक्ति में डूबा वातावरण दीपोत्सव की दिव्यता को और बढ़ा रहा था।
ऐसा लग रहा था मानो अयोध्या में रामराज्य की कल्पना साकार हो रही हो। सीएम की अगुवाई में यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत उत्सव नजर आ रहा था ।
रामरथ यात्रा के बाद प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के स्वरूप रामकथा पार्क पहुंचे और सुसज्जित मंच पर विराजमान हुए। प्रभु के मंच पर विराजते ही श्रद्धालुओं की निगाहें उनके दर्शन पर टिक गईं। मुख्यमंत्री ने मंच के समक्ष उपस्थित संतों का स्वागत और अभिनंदन किया।
संतों की उपस्थिति, प्रभु के स्वरूपों का दिव्य सानिध्य और रामभक्ति में डूबे श्रद्धालुओं का उत्साह पूरे परिसर को ऊर्जा से भर रहा था। इस दीपोत्सव में अयोध्या की धार्मिक परंपरा और सनातन संस्कृति का गौरव एक साथ दिखाई दिया।
अयोध्या का दीपोत्सव आस्था और संस्कृति का ऐसा वैश्विक उत्सव बन चुका है, जिसकी दिव्यता सीमाओं से परे लोगों को आकर्षित कर रही है। रामनगरी की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिली हैं।
प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने वाला यह आयोजन अयोध्या के गौरव को विश्व पटल पर स्थापित कर रहा है। दीपों की ज्योति, रामनाम की गूंज और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के बीच अयोध्या एक बार फिर संदेश दे रही है कि श्रीराम केवल आराध्य नहीं, बल्कि भारतीय जीवन, संस्कृति और आत्मा के आधार हैं।