राम मंदिर ट्रस्ट में खाली हुए ये 3 सबसे बड़े पद, PM मोदी के भारत लौटते ही अयोध्या राम मंदिर को मिलेगा नया CEO?

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बीच महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया। इस मामले को लेकर अब नई ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है।
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अयोध्या राम मंदिर (सौजन्य-IANS)
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Ram Mandir Trust CEO Appointment: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। तो वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट पर लग रहे आरोपों के चलते दो ट्रस्टियों ने अपना पद छोड़ दिया है। इस दौरान अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की संभावना बढ़ गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने भी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन की सिफारिश की थी। साथ ही नए प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बनाने की भी सिफारिश की थी।

ऐसे में ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक भी नजदीक है। 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक होने वाली है, जो कि चढ़ावा चोरी मामले के कारण बेहद महत्वपूर्ण होगी। बैठक में समय होने के कारण माना जा रहा है कि केंद्र सरकार भी इस बीच नए सीईओ की नियुक्ति कर सकती है। बैठक की तारीख नजदीक आने तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भारत लौट आएंगे तब केंद्र सरकार नए सीईओ के लिए अंतिम फैसला ले सकती है।

ट्रस्ट के महासचिव ने दिया इस्तीफा

एसआईटी की पहली रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ ट्रस्ट ने FIR दर्ज करा दी थी। जिसके बाद पुलिस ने 8 आरोपियों पर शिकंजा कसा था। साथ ही आरोपियों से करीब होने के कारण ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट्री डॉ. अनिल मिश्रा पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया। मिली जानकारी के अनुसार, संघ और विश्व हिंदू परिषद के दबाव के चलते दोनों पदाधिकारियों ने पीएमओ के निर्देश पर इस्तीफा सौंपा है।

हालांकि इस्तीफे को लेकर भी तमाम खबरें सामने आ रही थी। शनिवार को कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने एक पत्र ट्रस्ट के सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने इस्तीफे की बात सार्वजनिक की और बताया कि ट्रस्ट की बैठक में इसे स्वीकृत करने पर विचार होगा।

नए सीईओ के लिए ये नाम चर्चा में

11 जुलाई को होने वाली त्रैमासिक बैठक में ट्रस्टियों से चर्चा और विचार-विमर्श करने के बाद उनके इस्तीफे पर कोई फैसला लिया जाएगा। ट्रस्ट के सीईओ की नियुक्ति के लिए फिलहाल, कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस पद से लिए दो सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों का नाम काफी चर्चा में हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट के लिए राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का नाम सामने आया है। दूसरी ओर रिटायर्ड आइएएस योगेश्वर राम मिश्रा का भी नाम लिया जाने लगा है।

प्रयागराज के रहने वाले और 2005 बैच के IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा अभी उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा न्यायाधिकरण में सदस्य (प्रशासनिक) के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने जनवरी से मार्च 2016 तक अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट के तौर पर भी काम किया है।

इस्तीफे मंजूर होने पर तीन पद खाली हो जाएंगे

अगर दोनों ट्रस्टियों के इस्तीफे मंजूर हो जाते हैं, तो ट्रस्ट में तीन पद खाली हो जाएंगे। अयोध्या के शाही परिवार के मुखिया बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद से एक पद लगभग एक साल से खाली है।

इस बीच, कुछ अन्य ट्रस्टी जिनमें ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और सदस्य-वकील के. परासरन शामिल हैं। वे पहले से ही सेहत की समस्याओं और ज़्यादा उम्र के कारण सक्रिय नहीं हैं। वे सिर्फ ऑनलाइन बैठकों में ही शामिल हो पाते हैं। ऐसे में, अगर ट्रस्ट का पुनर्गठन होता है, तो इन ट्रस्टियों की जगह नए नामों पर भी विचार किया जा सकता है।

CEO पद के लिए ट्रस्ट के नियमों में बदलाव जरूरी

अगर केंद्र सरकार ट्रस्ट के लिए CEO नियुक्त करती है, तो सबसे पहले नियमों में बदलाव करना होगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रस्ट के नियमों में बदलाव किए बिना CEO नियुक्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि मौजूदा नियमों में CEO के पद का कोई प्रावधान नहीं है।

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