

Ayodhya Deepotsav Sarayu Maha Aarti: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दसवें दीपोत्सव को इस बार भी पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल बनाने का निर्णय लिया गया है। दीपोत्सव पर ‘ग्रीन आतिशबाज़ी’ से अयोध्या जगमगाएगी। सरयू नदी के ऊपर ‘ग्रीन सूर्य’ खिलेगा और धुएं की जगह स्वच्छ रोशनी से दिव्य नगरी नहा उठेगी। भव्यता के साथ स्वच्छता को भी प्राथमिकता देते हुए योगी आदित्यनाथ ने ‘इको-दीपोत्सव’ का मंत्र दिया है।
दीपोत्सव 2026 का सबसे बड़ा आकर्षण आकाशीय ‘ग्रीन सूर्य’ होगा। ई फैक्टर एक्सपीरिएंसेज लिमिटेड कंपनी के प्रतिनिधि अनुसार, यह ऐसा आतिशबाज़ी प्रदर्शन होगा जिसमें न तो जहरीला धुआं होगा और न ही कानों को चुभने वाला शोर।पर्यावरण-अनुकूल रासायनिक संयोजन से तैयार ग्रीन आतिशबाज़ियों से निर्मित यह सूर्य आकाश में सुनहरी और हरी रोशनी के संगम से एक दिव्य दृश्य रचेगा। हर रंग की लहर सरयू के ऊपर ऐसे बहेगी, जैसे जलती हुई आस्था हर दिशा में प्रकाश फैला रही हो। श्रद्धालु इस अनोखे दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठेंगे।
ग्रीन पटाखों की तकनीक विज्ञान और भक्ति का सुंदर मेल है। पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के सहयोग से दीपोत्सव की सभी आतिशबाज़ियां ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ से तैयार की जा रही हैं। इनमें बैरियम नाइट्रेट, एल्युमिनियम और स्ट्रोंशियम जैसे पारंपरिक तत्वों की जगह कम-कार्बन और कम-धुआं उत्पन्न करने वाले यौगिकों का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल वायु प्रदूषण कम होगा, बल्कि आस्था का पर्व पर्यावरण के अनुकूल भी बनेगा।
सरयू पुल के ऊपर तीन हाइड्रा तैनात की जाएंगी, जिनके माध्यम से 80 फीट ऊंचाई पर प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। यहां से भी आतिशबाज़ी होगी। इनमें चकरी, रिवर्स फायरिंग, एरियल, रॉकेट, विसिल क्रैकर, तिरंगा और इंद्रधनुष के विभिन्न रूपों का श्रद्धालु आनंद लेंगे। पूरा आयोजन भव्यता और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
इस बार अयोध्या के दसवें भव्य दीपोत्सव में तकनीक और कला का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। राम की पैड़ी पर सरयू नदी के मध्य लगभग 300 फीट लंबा और 50 फीट ऊंचा रामायण थीम पर आधारित भव्य सिनेमैटिक फसाड तैयार किया जा रहा है। इस विशाल संरचना पर अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से संपूर्ण रामायण की गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। योगी सरकार के इस प्रयास से सरयू तट पर रामायण की कथा न केवल सुनी जाएगी, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक के जरिए देखी और महसूस की जाएगी।
इस वर्ष के आयोजन में विशाल एलईडी वॉल और हाई-एंड प्रोजेक्टरों का सटीक सिंक्रोनाइजेशन करते हुए एक भव्य सिनेमैटिक अनुभव साकार किया जाएगा। दिल्ली से आई कंपनी ‘मॉडर्न स्टेज सर्विस’ के एक प्रतिनिधि के अनुसार, एलईडी वॉल पर प्रदर्शित हाई-रिजॉल्यूशन विजुअल्स और फसाड पर प्रोजेक्शन मैपिंग के अद्भुत तालमेल के साथ लेजर, डायनेमिक लाइटिंग और इमर्सिव साउंड इफेक्ट्स का संयोजन रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत कर देगा। लगभग 22 मिनट की इस विशेष प्रस्तुति में तकनीक के माध्यम से रामायण की संपूर्ण गाथा को प्रभावशाली दृश्यात्मक स्वरूप में दर्शाया जाएगा।
इसके साथ ही दिल्ली, मुंबई सहित देश के कोने-कोने से आए लगभग 150 कलाकार मंच पर रामायण के विभिन्न पात्रों का सजीव अभिनय करेंगे। लाइव परफॉर्मेंस, एलईडी वॉल और प्रोजेक्टरों के सटीक समन्वय तथा लेजर एवं लाइटिंग इफेक्ट्स के माध्यम से सरयू तट पर एक ऐसा भव्य और अविस्मरणीय रामायण का अनुभव साकार होगा, जो दीपोत्सव के आकर्षण को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा। योगी आदित्यनाथ सरकार की मंशा स्पष्ट है कि अयोध्या सिर्फ धार्मिक पर्यटन का केंद्र न बने, बल्कि विश्वस्तरीय सांस्कृतिक आयोजनों का भी मंच बने।पिछले वर्षों में दीपोत्सव के दौरान बनाए गए विश्व रिकॉर्ड और भव्य आयोजनों ने इसकी पुष्टि की है।
इस बार का सिनेमैटिक फसाड उसी विजन का विस्तार है, जिसमें पारंपरिक आस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़कर युवा पीढ़ी को भी आकर्षित किया जा रहा है। सरकार के प्रयासों से अयोध्या में आधारभूत संरचना के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्राथमिकता मिली है। राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद शहर में पर्यटकों की संख्या में हुई वृद्धि को देखते हुए ऐसे आयोजन पर्यटन को और बढ़ावा देंगे। दसवां दीपोत्सव अयोध्या की नई पहचान और योगी सरकार के सांस्कृतिक संकल्प का जीवंत प्रमाण बनने जा रहा है।
सात नवंबर को होने वाले भव्य आयोजन में सरयू तट पर 2,147 अर्चक सामूहिक महाआरती करेंगे। लक्ष्मण किला घाट से नया घाट और राम की पैड़ी तक होने वाली यह आरती संध्या करीब 5:20 से 5:50 बजे तक चलेगी। दीपोत्सव के दसवें संस्करण को भव्य बनाने के लिए सरयू नदी के 56 घाटों को विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। घाटों की सजावट और सामूहिक महाआरती के जरिए रामनगरी में आस्था और आध्यात्मिकता का भव्य नजारा देखने को मिलेगा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वर्ष 2017 में 1.71 लाख दीयों के प्रज्ज्वलन से शुरू हुआ दीपोत्सव इस बार अपने दसवें संस्करण में प्रवेश कर रहा है। इस बार सात नवंबर को करीब 30 लाख दीयों से रामनगरी को रोशन किया जाएगा।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव में सरयू तट पर होने वाली सामूहिक महाआरती प्रमुख आकर्षण होगी। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच हजारों दीपों से जगमगाते घाट अयोध्या की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा की भव्य छटा प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि हर साल महाआरती में अर्चकों की संख्या बढ़ती गई है। वर्ष 2024 में 1,121 और 2025 में 2,128 अर्चकों ने आरती की थी, जबकि इस बार 2,147 अर्चक एक साथ सरयू की महाआरती करेंगे। मंत्री ने बताया कि नौवें दीपोत्सव के दौरान वर्ष 2025 में 2,128 अर्चकों और वेदाचार्यों ने सामूहिक सरयू महाआरती कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया था।'
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि 'दीपोत्सव अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और जनभागीदारी का प्रतीक बन चुका है। हर वर्ष इस आयोजन का विस्तार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाई दे रहा है। इस बार भी दीपों की भव्य सज्जा, सामूहिक सरयू आरती और आधुनिक तकनीक के समन्वय से दीपोत्सव को यादगार बनाया जाएगा। हमारा प्रयास है कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालु यहां की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक वैभव का विशिष्ट अनुभव लेकर लौटें।'