

Deoria SHO Salary Deduction Compensation: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने में पुलिस द्वारा 4 लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों के जवाब पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। साथ ही पीड़ितों को 65 हजार रुपए का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश में सबसे खास बात यह रही कि इस मुआवजे की पूरी रकम संबंधित SHO के सैलरी से वसूलने का आदेश है।
गौरी बाजार मामले में महेंद्र गौर के साथ तीन अन्य ने कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। याचिका में पुलिस पर गौरी बाजार थाने में चार लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप लगाया गया था। मामला 13-24 अप्रैल, 2026 के बीच का बताया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस पर आरोप लगाया कि बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया के उन्हें थाने में रखा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने थाने का CCTV फुटेज पेश करने का निर्देश दिया था।
याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद कोर्ट में पुलिस की तरफ से बताया गया कि पुलिस स्टेशन के CCTV कैमरे खराब थे। घटना के समय काम नहीं कर रहे थे। पुलिस की इस दलील पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस अधिकारियों से कई सवाल उठाए। अदालत पुलिस से पूछा कि अगर 14 अप्रैल से कैमरा काम कर रहा था तो उसकी रिकॉर्डिंग कहां है? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पाया कि जनरल डायरी यानी GD पर पुलिस स्टेशन के CCTV कैमरे खराब होने की जानकारी को लेकर कोई एंट्री भी नहीं की गई थी। इस पर अदालत ने SHO के जवाब पर गंभीर सवाल किए।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट में गौरी बाजार थाने के SHO के साथ-साथ देवरिया जिले के पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर शंकर को भी पेश होना पड़ा। अदालत को SP ने बताया कि थाने में CCTV कैमरे खराब होने को लेकर उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई थी। SP के इस जवाब पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई और सवाल किया कि इतनी गंभीर लापरवाही के लिए संबंधित SHO के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अदालत ने SHO को निलंबित करने या उसके खिलाफ किसी अन्य प्रकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठाय।
कोर्ट में देवरिया के SP ने बिना शर्त माफी मांगी। इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि माफी कोर्ट से नहीं जनता से मांगनी चाहिए। इस दौरान अदालत ने ने कहा कि GD में एंट्री न करने वाले और जरूरी रिकॉर्ड वाले अधिकारी कड़ी कार्रवाई के हकदार हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को चारों याचिकाकर्ताओं को 65 हजार रुपए मुआवजे का निर्देश भी दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ये पूरी रकम संबंधित SHO के वेतन से ही वसूल की जाए।