

Aligarh Mid Day Meal Controversy: सरकारी विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित माहौल और पौष्टिक मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के दावों के बीच अलीगढ़ में सामने आ रहे मामलों ने शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ दिन पहले जर्जर विद्यालय की स्थिति को लेकर बच्चों के प्रदर्शन का मामला सामने आया था, वहीं अब थाना बरला क्षेत्र के गांव मदापुर स्थित सरकारी विद्यालय में मध्यान्ह भोजन में कथित अनियमितता को लेकर अभिभावकों के हंगामे का मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल बताया जा रहा है।
मदापुर के सरकारी विद्यालय में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था को लेकर अभिभावकों ने सवाल उठाते हुए हंगामा किया। सूचना मिलने पर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। आरोप है कि पुलिस द्वारा विद्यालय के अध्यापकों का पक्ष लिए जाने से ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया। इसी दौरान विद्यालय की छात्राओं ने शिक्षिकाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
छात्राओं का आरोप है कि उनसे विद्यालय में झाड़ू लगवाई जाती है और परिसर की साफ-सफाई कराई जाती है। इतना ही नहीं, छात्राओं ने शिक्षिकाओं पर झूठे बर्तन धुलवाने और पैर दबवाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। बच्चों के इन आरोपों के बाद मौके पर मौजूद अभिभावकों में नाराजगी फैल गई।
परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने विद्यालय में बच्चों से कराए जा रहे कथित कार्यों पर आपत्ति जताई तो उन्हें चप्पलों से मारने की धमकी तक दी गई। इसके बाद मामला और गरमा गया। पीड़ित परिजनों की ओर से थाना बरला में तहरीर देकर पूरे प्रकरण की जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
अलीगढ़ में सरकारी विद्यालयों को लेकर यह पहला मामला नहीं है, जिसने सवाल खड़े किए हों। बीते दिनों एक जर्जर विद्यालय की स्थिति को लेकर बच्चों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। बच्चों की मांग थी कि उन्हें किसी दूसरे विद्यालय में स्थानांतरित किया जाए, क्योंकि विद्यालय भवन की हालत इतनी खराब थी कि कभी भी हादसा होने की आशंका जताई जा रही थी। बच्चों के प्रदर्शन के बाद यह मामला चर्चा में आया था।
वहीं, जिले में पूर्व में शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी सामने आ चुकी है। ऐसे में मदापुर के विद्यालय का ताजा मामला सरकारी स्कूलों में निगरानी और व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, बच्चों और अभिभावकों की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। बड़ा सवाल यह भी है कि यदि छात्राओं से वास्तव में झाड़ू लगवाने, बर्तन धुलवाने या अन्य निजी कार्य कराए गए हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों की नियमित निगरानी किस तरह की जा रही है?
फिलहाल वायरल वीडियो और थाने में दी गई तहरीर के बाद निगाहें शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले की जांच किस स्तर पर कराता है और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। मदापुर का यह मामला एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर रहा है कि सरकारी विद्यालयों में बच्चे पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं या फिर उनसे दूसरे काम कराए जा रहे हैं?