

Aligarh MP Satish Gautam Statement: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से भारतीय जनता पार्टी के सांसद सतीश गौतम एक बार फिर अपने तीखे और विवादास्पद बयानों को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार उन्होंने मुहर्रम के त्योहार और जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर कुछ ऐसी बातें कह दी हैं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है। इस बयान के सामने आने के बाद इलाके में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए सांसद सतीश गौतम ने अलीगढ़ की कानून-व्यवस्था पर योगी सरकार और स्थानीय प्रशासन की जमकर पीठ थपथपाई। उन्होंने बेहद रौबदार अंदाज में कहा, "अलीगढ़ में पथराव की बात तो बहुत दूर की है, यहाँ अब पंछी भी प्रशासन से पूछकर ही उड़ता है।" उन्होंने साफ किया कि जिले का पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और किसी को भी हुड़दंग मचाने की इजाजत नहीं मिलेगी।
जब पत्रकारों ने उनसे आगामी मुहर्रम के त्योहार की तैयारियों को लेकर सवाल पूछा, तो सांसद का रुख काफी अलग दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पर्व के बारे में ज्यादा गहरी जानकारी नहीं है। उन्होंने दूसरे धार्मिक आयोजनों का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बाकी प्रोग्राम शांति से होते हैं, वैसे ही यह भी नियमों के तहत होना चाहिए।
बातचीत के दौरान सांसद ने एक चौंकाने वाली बात भी कही। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह अपनी जुबान से “मुहर्रम” शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि जो भी कार्यक्रम या रीति-रिवाज होंगे, वे पूरी तरह से प्रशासनिक गाइडलाइंस और कायदे-कानून के दायरे में रहकर ही किए जाने चाहिए।
सांसद सतीश गौतम यहीं नहीं रुके, उन्होंने बातों-बातों में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का मुद्दा भी छेड़ दिया। उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अब एएमयू (AMU) के कैंपस के अंदर भी “जय श्रीराम” और “हर-हर महादेव” के नारे गूंजते हुए सुनाई देते हैं। उन्होंने इसे अलीगढ़ के बदलते हुए माहौल और मजबूत राजनीतिक नेतृत्व का नतीजा बताया। धार्मिक जुलूसों और रास्तों को लेकर भी भाजपा सांसद ने बेहद कड़ा और सख्त रुख दिखाया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बिना सरकारी और प्रशासनिक अनुमति के जिले में कोई भी नया या पुराना जुलूस नहीं निकाला जाएगा। प्रशासन ही जुलूस का रूट तय करेगा ताकि किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और आलोचकों ने भाजपा सांसद को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है। विरोधियों का कहना है कि “पंछी भी पूछकर उड़ता है” जैसा बयान सांसद के सत्ता के अहंकार को दिखाता है। विपक्ष का आरोप है कि यह टिप्पणी जानबूझकर एक वर्ग विशेष को डराने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए की गई है। सतीश गौतम पहले भी अपने ऐसे बयानों के लिए चर्चा में रहे हैं।