मोदी सरकार को सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार नहीं! महिला बिल पर अखिलेश ने बोला हमला, बताया BJP का CNF फॉर्मूला

Akhilesh Yadav News: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल को भाजपा की 'बदनीयत का दस्तावेज' बताया। उन्होंने CMF फॉर्मूले का आरोप लगाते हुए जातीय जनगणना के बाद ही आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई।
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अखिलेश यादव (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Akhilesh Yadav on Women Reservation Bill: अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर जोरदार हमला बोला। लोकसभा में यह विधेयक पारित न हो पाने के बाद उन्होंने इसे “ऐतिहासिक दिन” बताया और कहा कि सरकार को अब सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे को लागू करने के बजाय इसे सिर्फ एक राजनीतिक नारे में बदलना चाहती है। उन्होंने भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ‘CMF फॉर्मूला’ Create, Mislead और Fear पर काम कर रही है, यानी मुद्दे बनाना, लोगों को गुमराह करना और डर का माहौल तैयार करना।

असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश

उन्होंने आगे कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के जरिए असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की गई। उनके मुताबिक, यह विधेयक “भाजपा की बदनीयत का काला दस्तावेज” था, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर पारित नहीं होने दिया। अखिलेश यादव ने साफ किया कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि जिस तरीके से इसे अन्य प्रावधानों जैसे परिसीमन के साथ जोड़कर लाया गया, उसी का विरोध है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन इसके लिए सही और पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी है।

दोहराई जातीय जनगणना की मांग

उन्होंने जातीय जनगणना की मांग को भी दोहराते हुए कहा कि पहले इसकी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, ताकि आरक्षण की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके और सभी वर्गों को न्याय मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर जातीय जनगणना से बच रही है, क्योंकि इससे आरक्षण की मांग और मजबूत होगी।

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि देश में सिर्फ आरक्षण ही नहीं, बल्कि “संरक्षण” की भी जरूरत है, ताकि हर वर्ग के अधिकार सुरक्षित रह सकें। उनका मानना है कि यदि जनगणना के बाद यह विधेयक लाया जाता, तो शायद सभी दल इसके समर्थन में होते।

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल के जरिए सरकार कुछ अन्य छिपे हुए एजेंडे भी लाना चाहती थी, जिसका विपक्ष ने मजबूती से विरोध किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक “लक्ष्मण रेखा” खींच दी है, जिसे भाजपा पार नहीं कर पाई।

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