

गुलाबी ठंड के बीच दमघोंटू होती जा रही हवा
कई शहरों में बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक
दीपावली के आसपास प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका से बढ़ी चिंता
Agra Pollution: नवंबर की दस्तक के साथ ही उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। सुबह और रात के समय गुलाबी ठंड का एहसास होने लगा है। रात का तापमान लगातार नीचे जा रहा है, लेकिन मौसम में इस बदलाव के साथ ही एक दूसरी गंभीर समस्या भी तेजी से पैर पसार रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि लोगों के लिए खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल होता दिखाई दे रहा है।
शनिवार, 7 नवंबर 2026 की सुबह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार दिल्ली-NCR के साथ-साथ कानपुर, लखनऊ और आगरा में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) चिंताजनक स्तर पर दर्ज किया गया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 367 से 441 के बीच पहुंच गया। वहीं, नोएडा में यह 232 से 414 के बीच दर्ज किया गया। गाजियाबाद में भी प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों की बात करें तो औद्योगिक नगरी कानपुर और नवाबी नगरी लखनऊ भी प्रदूषण की समस्या से जूझ रही हैं। ताजनगरी आगरा में भी हालात राहत देने वाले नहीं हैं। यहां अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 271 से 359 के बीच दर्ज किया गया। यानी ताजमहल और पर्यटन के लिए दुनिया भर में पहचान रखने वाली आगरा की आबोहवा भी प्रदूषण की मार झेल रही है।
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि दीपावली के आसपास ही प्रदूषण का ग्राफ तेजी से ऊपर जाता दिखाई दे रहा है। अभी त्योहार के दौरान आतिशबाजी और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों का प्रभाव पूरी तरह सामने आना बाकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब त्योहार से पहले ही दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के कई शहरों की हवा बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच रही है तो दीपावली के बाद हालात किस स्तर तक बिगड़ सकते हैं।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण यानी ग्रेप-3 की पाबंदियां लागू की गई हैं। इसका उद्देश्य प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर नियंत्रण करना और लोगों को जहरीली हवा के दुष्प्रभाव से बचाना है।
बढ़ते वायु प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रदूषण का स्तर अधिक रहने पर सुबह की सैर और खुले स्थानों पर व्यायाम करने से बचें। बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और N95 मास्क का इस्तेमाल करें।
कुल मिलाकर नवंबर की शुरुआत में ही उत्तर भारत के प्रमुख शहरों की आबोहवा ने चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ सर्दी का असर बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ प्रदूषण की जहरीली चादर शहरों को अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है। सवाल सिर्फ दिल्ली या NCR का नहीं, बल्कि उन तमाम शहरों का है जहां विकास, औद्योगीकरण और बढ़ते वाहनों के बीच स्वच्छ हवा लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।