आगरा में जया किशोरी की कथा: कंस वध, गोपी-उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र ने दिया प्रेम, धर्म और संस्कार का संदेश

Jaya Kishori Katha Agra: आगरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में जया किशोरी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए भगवान के सम्मान, प्रेम, ईमानदारी और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दिया।
Jaya Kishori Urges Respect for God, Mesmerizes Devotees with Krishna's Divine Leelas Agra
आगरा में जया किशोरी की कथा (सोर्स- फोटो नवभारत)
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Jaya Kishori Shrimad Bhagwat Katha Programme: फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को पूज्यश्री जया किशोरी ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, प्रेम और सामाजिक जीवन का गहरा संदेश दिया। कथा के दौरान कंस वध, गोपी-उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र का ऐसा मार्मिक चित्रण हुआ कि पूरा पंडाल "कृष्ण कन्हैया लाल की जय" के उद्घोष से गूंज उठा।

जया किशोरी ने कहा कि भगवान की लीलाओं को सांसारिक दृष्टि से नहीं, बल्कि भगवत दृष्टि से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज समाज में मजाक के नाम पर भगवान का उपहास किया जा रहा है, जबकि दुख की घड़ी में वही लोग ईश्वर के सामने हाथ जोड़ते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि यदि हम स्वयं अपने आराध्य का सम्मान करेंगे, तभी समाज भी उनका सम्मान करेगा। यदि भगवान के नाम पर होने वाले उपहास पर लोग हंसना बंद कर दें, तो ऐसे प्रसंग स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

ज्ञान से ऊपर है प्रेम

गोपी-उद्धव प्रसंग का वर्णन करते हुए जया किशोरी ने बताया कि श्रीकृष्ण का प्रेम ज्ञान से भी श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि ब्रजवासियों के लिए श्रीकृष्ण से बढ़कर कुछ नहीं था। "कृष्ण के प्रेम में रहकर नरक भी स्वीकार है, लेकिन उनसे दूर रहकर स्वर्ग भी नहीं चाहिए"— इस भाव को सुनकर कथा पंडाल में मौजूद अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

सुदामा चरित्र से ईमानदारी का संदेश

सुदामा चरित्र के माध्यम से उन्होंने कहा कि जीवन में कभी किसी का अधिकार नहीं छीनना चाहिए। मेहनत की कमाई ही सबसे बड़ा धन है और ईमानदारी से अर्जित संपत्ति ही सुख देती है।

'सॉरी' ने गलतियों को आसान बना दिया

समाज और परिवार पर चर्चा करते हुए जया किशोरी ने कहा कि आज "सॉरी" शब्द ने लोगों को गलती करने की छूट दे दी है। उन्होंने कहा कि सच्चा प्रेम वही है, जिसमें सम्मान बना रहे। विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय जल्दबाजी में नहीं, बल्कि पूरी समझदारी और परिपक्वता के साथ लेने चाहिए। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों को रिश्तों की गंभीरता समझने का संदेश दिया।

भजनों पर झूम उठा कथा पंडाल

"जय-जय राधारमण हरि बोल", "चलो रे मन श्री वृंदावन धाम" और "जमुना किनारे मोरा गांव" जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर झूम उठे। कथा के समापन पर आरती हुई और सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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