Hindu Leaders Statement Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण करोड़ों हिंदुओं की सदियों पुरानी आस्था, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। इस मंदिर के निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हजारों कार्यकर्ताओं ने लंबा आंदोलन किया।
अनेक रामभक्तों ने बलिदान दिया, तब जाकर रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए। ऐसे में हाल ही में सामने आए चंदा चोरी के आरोपों ने देशभर के श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
हालांकि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है, लेकिन इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। वहीं राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ हिंदूवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ लोग इस मुद्दे के बहाने हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचाने और मंदिर की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
नवभारत से बातचीत में राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले हिंदूवादियों ने कहा कि जो लोग आज मंदिर और सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपने अतीत को भी याद करना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि 1990 के दशक में रामभक्तों पर गोलियां और लाठियां चलाने वाले लोगों को आज राम मंदिर की चिंता जताना शोभा नहीं देता।
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हिंदूवादी नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए समय मांगा है। ऐसे में विपक्ष को धैर्य रखना चाहिए और प्रदेश का माहौल खराब करने से बचना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि एसआईटी की जांच निष्पक्ष होगी और यदि किसी ने मंदिर की धनराशि में गड़बड़ी की है तो उसे कानून और समाज दोनों के सामने जवाब देना पड़ेगा।
रामभक्तों का कहना है कि प्रभु श्रीराम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र है और उनके मंदिर पर किसी भी प्रकार का कलंक नहीं लगने दिया जाएगा। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली और जांच प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। उनका मानना है कि सत्य सामने आएगा और दोषियों को उनके कर्मों का उचित परिणाम अवश्य मिलेगा।