

Agra Samajwadi Party: विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी भी लगातार सक्रिय नजर आ रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार केंद्र और प्रदेश सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं, चुनावी तैयारियों के बीच आगरा में समाजवादी पार्टी का अंदरूनी विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चल रही बयानबाजी ने संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
मामला समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय सचिव रहीं मोनिका नाज़ खान से जुड़ा है। मोनिका नाज़ खान ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद महानगर संगठन के कुछ पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि महानगर अध्यक्ष के इशारे पर पार्टी के कुछ कार्यकर्ता सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी छवि और चरित्र को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने प्रमुख रूप से महानगर उपाध्यक्ष जमीलुद्दीन खान और नासिर खान का नाम लिया था। मोनिका नाज़ खान का आरोप था कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर लगातार दुष्प्रचार किया जा रहा है।
दूसरी ओर, जमीलउद्दीन और नासिर खान ने प्रेसवार्ता कर अपने पदों से मुक्त होने की घोषणा की थी। प्रेसवार्ता के दौरान जमीलुद्दीन ने मोनिका नाज़ खान पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि मोनिका नाज़ खान प्रभावशाली हैं और उनके खिलाफ बोलने वालों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि लोगों पर गंभीर आरोप लगाकर उन्हें ब्लैकमेल और वसूली करने का प्रयास किया जाता रहा है।
वहीं, मोनिका नाज़ खान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि बाहरी लोग समाजवादी पार्टी की छवि को धूमिल करने और पार्टी को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना था कि पार्टी के भीतर चल रही इस तरह की गतिविधियों से संगठन को नुकसान पहुंच रहा है।
इस पूरे विवाद में अब समाजवादी पार्टी से लंबे समय से जुड़ी नसीम खातून की एंट्री से मामला एक बार फिर गरमा गया है। नसीम खातून का कहना है कि वह वर्ष 2001 से समाजवादी पार्टी से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचकर खड़ा किया है और ऐसे समय में पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से कार्यकर्ताओं में नाराजगी पैदा होती है।
नसीम खातून ने मोनिका नाज़ खान पर पार्टी की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संगठन को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी में अनुशासन और एकजुटता बेहद जरूरी है और अंदरूनी विवाद का असर संगठन पर पड़ सकता है।
नसीम खातून ने महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास के कामकाज का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के कुनबे को बढ़ाने और संगठन को सक्रिय रखने का काम किया है। उनका दावा है कि महानगर अध्यक्ष लगातार पार्टी को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
उन्होंने मोनिका नाज़ खान के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि महानगर अध्यक्ष के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाने के पीछे क्या वजह है, इसकी जांच पार्टी स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसी के बहकावे में आकर अथवा किसी अन्य उद्देश्य से महानगर अध्यक्ष को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आगरा में समाजवादी पार्टी के भीतर सामने आ रहा यह विवाद अब संगठन के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। एक ओर पार्टी जहां चुनावी तैयारियों और संगठन विस्तार में जुटी है, वहीं दूसरी ओर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस विवाद को किस तरह सुलझाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
उधर, इस मसले पर जब मोनिका नाज़ खान से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि नसीम खातून सपा की पुरानी कार्यकर्ता हैं, वह उनको लेकर कोई टिप्पणी नहीं करेंगी। मोनिका ने कहा लेकिन अब सब समझ में आ रहा है कि यह सब एक षड़यंत्र के तहत हो रहा है और यह पूरी साजिश के तहत किया जा रहा है। मोनिका ने यह भी कहा कि क्या नसीम खातून महिला विरोधी हैं, जो एक महिला के उत्पीड़न पर इस तरह की टिप्पणी कर रही हैं। मोनिका ने नव भारत से कहा कि सिंह खातून ने जो भी मेरे लिए कहा है वह एकदम भ्रामक है। वह वरिष्ठ है मैं उनका सम्मान करती हूं लेकिन यह नहीं कि मैं अपने अपमान और षड़यंत्र को लेकर चुप रहूंगी। मैं अपने अखिलेश भैया यानी कि सपा प्रमुख के आदेश निर्देश का इंतजार कर रही हूं।
बहरहाल, आगरा में सपा का कुनबा बिखरता हुआ दिखाई दे रहा है, सपा परिवार की कलह खुलकर सड़क पर आ चुकी है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब सभी राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं। पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला निश्चित तौर पर समाजवादी पार्टी की छवि को धूमिल ही नहीं कर रहा बल्कि विधानसभा चुनाव 2027 में पार्टी को भारी नुकसान पहुंच सकता है। अब पूरे मामले को लेकर सभी की निगाहें सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तरफ टिकी हुई हैं।