

Agra Nathuram Godse Tarpan Programme: गांधी जयंती के दिन जहां पूरा देश राष्ट्र पिता महात्मा गांधी को नमन कर रहा था वहीं इसी दौरान आगरा में उनकी हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे का हिंदूवादी नेता तर्पण और श्राद्ध कर रहे थे। यह कार्यक्रम होता उससे पूर्व ही पुलिस ने दखल देकर रोकने का प्रयास किया और बखेड़ा खड़ा हो गया।
बता दें कि अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से बेलनगंज स्थित यमुना आरती स्थल पर नाथूराम गोडसे के तर्पण, हवन-पूजन और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया था। कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और आयोजन को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया।
तय कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को करीब 11 बजे अखिल भारत हिंदू महासभा के पदाधिकारी अज्जू चौहान, मीरा राठौर और संजय जाट समेत संगठन के कार्यकर्ता यमुना आरती स्थल पहुंचे। यहां पहले से मौजूद पुलिस ने उन्हें प्रस्तावित कार्यक्रम करने से रोक दिया। कार्यक्रम को लेकर कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कहासुनी के बाद झड़प की स्थिति बन गई।
पुलिस ने कार्यक्रम से संबंधित सामान को अपने कब्जे में ले लिया और हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर थाने भेज दिया। घटना के बाद यमुना आरती स्थल और आसपास के क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
हिंदू महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य गांधी जयंती का विरोध करना नहीं था। संगठन का कहना है कि वे नाथूराम गोडसे को अपना पूर्वज मानते हैं और पितृपक्ष के तहत उनका तर्पण करना चाहते थे। इसी उद्देश्य से यमुना किनारे तर्पण, हवन-पूजन और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया था।
हालांकि, पुलिस ने मौके पर कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी और कार्यकर्ताओं को वहां से हटाकर हिरासत में ले लिया। पुलिस हिंदू महासभा को अपने साथ अज्ञात स्थान पर ले गई। आयोजन को लेकर पुलिस और हिंदू महासभा के बीच तनातनी के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।
मामले को लेकर कांग्रेस ने भी कार्यक्रम की आलोचना की है। गांधी जयंती के दिन गोडसे के तर्पण कार्यक्रम को लेकर सामने आए विवाद के बाद आगरा में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पुलिस की कार्रवाई और हिंदू महासभा के कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
फिलहाल पुलिस की मौजूदगी में यमुना आरती स्थल पर स्थिति नियंत्रण में है। कार्यक्रम को रोकने और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद मामले ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक रंग लेता हुआ दिखाई दे रहा है।