

CMRS Inspection Agra Metro Corridor 1: आगरा मेट्रो के मनकामेश्वर से आईएसबीटी तक नवनिर्मित कॉरिडोर पर यात्रियों की आवाजाही शुरू होने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। मेट्रो रेल संरक्षा आयुक्त (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता और उनकी पांच सदस्यीय टीम ने दो दिनों तक इस पूरे सेक्शन का गहन निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण किया।
निरीक्षण के दूसरे दिन मेट्रो ट्रेन को अधिकतम निर्धारित 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाकर हाई-स्पीड रन, स्पीड एवं ब्रेकिंग टेस्ट समेत कई महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए।
सीएमआरएस निरीक्षण के साथ ही आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-1 के ताज ईस्ट गेट से आईएसबीटी तक फाइनल इंटीग्रेटेड टेस्टिंग भी पूरी हो गई। इसमें पुराने संचालित सेक्शन ताज ईस्ट गेट-मनकामेश्वर और नवनिर्मित मनकामेश्वर-आईएसबीटी सेक्शन को एकीकृत कर सिग्नलिंग, टेलीकॉम, विद्युत आपूर्ति, ट्रैक और ट्रेन संचालन सहित सभी प्रमुख प्रणालियों का समन्वित परीक्षण किया गया। इसके बाद मेट्रो सेवाएं 21 अगस्त से निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित होंगी।
सीएमआरएस टीम ने निरीक्षण के पहले दिन मोटर ट्रॉली से मनकामेश्वर से आरबीएस रैंप तक ट्रैक का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, राजा की मंडी, आरबीएस कॉलेज और आईएसबीटी स्टेशनों का भी निरीक्षण किया गया।
स्टेशनों पर यात्री सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं के साथ तकनीकी कक्ष, स्टेशन कंट्रोल रूम, एस्केलेटर, लिफ्ट, फायर अलार्म सिस्टम और प्लेटफॉर्म से जुड़ी व्यवस्थाओं की गहन जांच की गई। अधिकारियों ने विभिन्न तकनीकी और सुरक्षा मानकों का मौके पर परीक्षण किया।
दूसरे दिन सीएमआरएस ने मनकामेश्वर स्टेशन से मेट्रो ट्रेन के जरिए निरीक्षण की शुरुआत की। टीम नवनिर्मित सेक्शन के अंतिम स्टेशन आईएसबीटी तक पहुंची। इस दौरान सिग्नलिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली को परखने के लिए महत्वपूर्ण कॉलिजन टेस्ट भी किया गया।
परीक्षण के दौरान दो ट्रेनों को आमने-सामने लाकर टक्कर जैसी परिस्थिति बनाई गई। निर्धारित सुरक्षित दूरी पर पहुंचते ही ट्रेन में ऑपरेटर के किसी हस्तक्षेप के बिना स्वचालित रूप से ब्रेक लग गए। इससे मेट्रो में इस्तेमाल हो रही अत्याधुनिक सिग्नलिंग और सुरक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता को परखा गया।
आगरा मेट्रो में कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) सिग्नलिंग तकनीक के साथ ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन (एटीओ) की सुविधा है। इस प्रणाली में ट्रेन संचालन की कई प्रक्रियाएं स्वचालित होती हैं, जिससे मानवीय त्रुटि की संभावना कम होती है।
सीएमआरएस निरीक्षण के दौरान ट्रेन को उसकी अधिकतम निर्धारित गति 80 किमी प्रति घंटा पर चलाया गया। हाई-स्पीड रन के साथ स्पीड और ब्रेकिंग टेस्ट भी हुआ। अधिकतम गति पर ट्रेन को संचालित कर अचानक ब्रेकिंग की स्थिति में सिस्टम की प्रतिक्रिया और ब्रेकिंग क्षमता का परीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार, निदेशक अवसंरचना सीपी सिंह, निदेशक रोलिंग स्टॉक नवीन कुमार और परियोजना निदेशक अरविंद राय समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि सीएमआरएस निरीक्षण में यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हाई-स्पीड, स्पीड एवं ब्रेकिंग समेत सभी तकनीकी परीक्षण वैज्ञानिक और सावधानीपूर्वक किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि आगरा मेट्रो ने निर्माण के दौरान अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मनकामेश्वर से आईएसबीटी तक मेट्रो संचालन शुरू होने के बाद शहर के सबसे व्यस्त हिस्सों में सफर तेज, सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।