

Agra Illegal Religious Structures: उत्तर प्रदेश में सरकारी भूमि और सार्वजनिक स्थलों पर बने कथित अवैध धार्मिक ढांचों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच आगरा में भी यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष अजय तोमर ने दावा किया कि एमजी रोड स्थित एक मजार पर कार्रवाई केवल शुरुआत है और आगरा में अभी करीब 27 कथित अवैध मस्जिदों, मजारों और दरगाहों पर प्रशासन को कार्रवाई करनी बाकी है।
"नवभारत से विशेष बातचीत में योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष अजय तोमर ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि एमजी रोड की कार्रवाई केवल शुरुआत है। उनका दावा है कि आगरा में कई अन्य कथित अवैध मस्जिदों, मजारों और दरगाहों पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष अजय तोमर ने कहा कि प्रशासन को नोटिस दिया जा चुका है, मामला न्यायालय में विचाराधीन है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन करेगा तथा कानूनी लड़ाई भी जारी रखेगा।"
अजय तोमर ने कहा कि इस संबंध में पुलिस और जिला प्रशासन को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है। साथ ही मामले को न्यायालय में भी उठाया गया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर बने अवैध अतिक्रमणों को हटाने को लेकर न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए और यदि कोई धार्मिक ढांचा अवैध रूप से सरकारी भूमि पर बना है तो उस पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
अजय तोमर ने आरोप लगाया कि यदि प्रशासन इन मामलों में कार्रवाई नहीं करता है तो योगी यूथ ब्रिगेड आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अजय तोमर ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संगठन न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाएगा। उनके अनुसार इस मामले से संबंधित वाद जनपद न्यायालय में विचाराधीन है, जिसमें नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा जिलाधिकारी आगरा को न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करना है।
योगी यूथ ब्रिगेड का कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और प्रशासन को निष्पक्ष एवं कानून के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
फिलहाल आगरा में कथित अवैध धार्मिक ढांचों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर प्रशासन कानून के दायरे में कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न संगठन अपने-अपने पक्ष के साथ सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायालय की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।