आगरा में पार्क की जमीन को लेकर भाजपा विधायक और पार्षद आमने-सामने, भूख हड़ताल पर बैठीं हेमलता चौहान

Agra Land Dispute: पार्क की जमीन पर आयुर्वेद अस्पताल स्थापित करने की मंशा को लेकर भाजपा विधायक जीएस धर्मेश और पार्षद हेमलता बीच विवाद शुरू हो गया। यह टकराव भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
BJP MLA and councilor at odds over park land in Agra; Hemlata Chauhan sits on a hunger strike.
पार्षद हेमलता (सोर्स-नवभारत लाइव)
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  • पार्क बनाम आयुर्वेद अस्पताल का विवाद

  • जमीन के इस्तेमाल पर उठा सवाल

  • भाजपा की मुश्किलें बढ़ने के आसार

  • दो जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती खींचतान

Agra Land Dispute: देश में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच अब आगरा में भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही टकराव सामने आ गया है। नगर निगम के वार्ड संख्या-5 स्थित हिमाचल कॉलोनी के एक पार्क की जमीन को लेकर भाजपा विधायक डॉ. जीएस धर्मेश और भाजपा पार्षद हेमलता चौहान आमने-सामने हैं। पार्षद जहां इस जमीन को पार्क के रूप में विकसित कराए रखने की मांग कर रही हैं, वहीं विधायक की ओर से यहां आयुर्वेद अस्पताल स्थापित करने की मंशा सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है। मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया, जब पार्षद हेमलता चौहान अपनी मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गईं।

यह विवाद अब केवल एक पार्क की जमीन तक सीमित नहीं रह गया है। इसके केंद्र में स्थानीय निवासियों की जरूरतें, सार्वजनिक जमीन का उपयोग और भाजपा के दो जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती खींचतान जैसे सवाल भी खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर सामने आया यह टकराव राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

छह महीने की मेहनत के बाद विकसित हुए पार्क के इस्तेमाल पर विवाद

हिमाचल कॉलोनी का यह पार्क कभी कूड़े के ढेर और गंदगी के लिए जाना जाता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां लंबे समय तक कूड़ा जमा रहता था। मृत पशुओं के अवशेष और मृत नवजात शिशुओं के शव मिलने जैसी घटनाओं के कारण क्षेत्र में दुर्गंध और अस्वच्छता का माहौल बना रहता था। हालात ऐसे थे कि लोगों को यहां से गुजरने में भी परेशानी होती थी।

BJP MLA and councilor at odds over park land in Agra; Hemlata Chauhan sits on a hunger strike.
स्थानीय लोग(सोर्स-नवभारत लाइव)

स्थानीय पार्षद हेमलता चौहान और क्षेत्रीय निवासियों ने मिलकर इस स्थान की सफाई और इसे पार्क के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास किए। स्थानीय लोगों का दावा है कि सफाई अभियान और जगह को उपयोग के लायक बनाने में उन्हें एक से दो महीने तक लगातार मेहनत करनी पड़ी। इसके बाद पार्क धीरे-धीरे विकसित होने लगा और क्षेत्र के लोगों को सुबह-शाम टहलने के लिए एक नजदीकी स्थान मिलने लगा।

पार्षद के मुताबिक, पार्क को विकसित कराने के लिए वह पिछले करीब छह महीने से प्रयास कर रही थीं। इस संबंध में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की ओर से पत्र जारी किए जाने का भी उल्लेख किया जा रहा है। नगर आयुक्त और महापौर ने भी मौके का निरीक्षण कर अपनी संस्तुति दी थी। ऐसे में अब इस जमीन पर आयुर्वेद अस्पताल बनाने का प्रस्ताव सामने आने से विवाद खड़ा हो गया है।

पार्क की जगह आयुर्वेद अस्पताल बनाने की मंशा पर सवाल

विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि हिमाचल कॉलोनी की इस जमीन का इस्तेमाल पार्क के रूप में जारी रखा जाए या यहां आयुर्वेद अस्पताल स्थापित किया जाए। स्थानीय विधायक डॉ. जीएस धर्मेश की ओर से इस स्थान पर आयुर्वेद अस्पताल खोलने की मंशा सामने आने के बाद पार्षद और स्थानीय निवासियों ने विरोध शुरू कर दिया है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में ऐसी दूसरी पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं है, जहां इसी तरह का पार्क विकसित किया जा सके। उनके मुताबिक, पार्क बनने से पहले क्षेत्र के अनेक लोगों को सुबह-शाम टहलने के लिए आगरा कैंट और सदर की ओर जाना पड़ता था। दूर जाने के दौरान कई बार दुर्घटनाओं का सामना करने की बात भी स्थानीय निवासियों ने कही है।

क्षेत्र में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और सेवानिवृत्त अधिकारी रहते हैं। उनके लिए यह पार्क नियमित सैर और आपसी मेलजोल का महत्वपूर्ण स्थान बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक उपेक्षित रही इस जमीन को मेहनत से साफ कर उपयोगी बनाया गया है। ऐसे में वे इसे फिर किसी दूसरे इस्तेमाल में दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं।

'जिलाधिकारी नहीं आएंगे, तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी'

पार्क को लेकर बढ़ते विवाद के बीच भाजपा पार्षद हेमलता चौहान ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि जब तक जिलाधिकारी मनीष बंसल मौके पर नहीं पहुंचते और उनकी मांग पर विचार नहीं करते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

पार्षद का रुख साफ है कि पार्क को स्थानीय जनता के हित में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, इस विवाद ने भाजपा के भीतर स्थानीय स्तर पर मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। एक तरफ पार्षद नगर निगम के सदन में क्षेत्र की समस्याएं उठाने और जनता के हितों की पैरवी करने वाली जनप्रतिनिधि के रूप में सामने हैं, तो दूसरी तरफ स्थानीय विधायक की अस्पताल संबंधी योजना को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, जमीन के स्वामित्व, उसके वर्तमान दर्ज उपयोग और आयुर्वेद अस्पताल के प्रस्ताव की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना भी जरूरी है। विवाद के अंतिम समाधान में इन तथ्यों और संबंधित विभागों के अभिलेखों की अहम भूमिका होगी।

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15 साल से विधायक थे, तब क्यों नहीं हुआ विकास?

'नवभारत' से विशेष बातचीत में स्थानीय निवासियों ने कहा कि विधायक डॉ. जीएस धर्मेश करीब 15 वर्षों से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन जब यह स्थान कूड़े और गंदगी से भरा रहता था, तब इसके विकास पर ध्यान नहीं दिया गया। लोगों का आरोप है कि जब स्वच्छता अभियान के तहत इस स्थान को विकसित पार्कों की सूची में शामिल किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई और जमीन का स्वरूप बदलने लगा, तभी इसके इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आया।

स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट कहा कि वे अपनी पार्षद हेमलता चौहान के साथ खड़े हैं और किसी भी कीमत पर पार्क को खोना नहीं चाहते। उनका कहना है कि पार्क केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि क्षेत्र की स्वच्छता, स्वास्थ्य और सामुदायिक जीवन से जुड़ी जरूरत है।

लोगों के मुताबिक, यदि यह जमीन पार्क के रूप में सुरक्षित नहीं रही, तो कॉलोनी के निवासियों के पास सुबह-शाम टहलने के लिए कोई दूसरा उपयुक्त स्थान नहीं बचेगा। इसलिए प्रशासन को स्थानीय आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए।

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भाजपा के लिए बढ़ सकती है राजनीतिक चुनौती

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच आगरा में भाजपा के विधायक और पार्षद के बीच यह टकराव पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। अब तक विपक्ष सरकार और सत्तारूढ़ दल को विभिन्न मुद्दों पर घेरता रहा है, लेकिन जब पार्टी के अपने जनप्रतिनिधि ही किसी स्थानीय मुद्दे पर आमने-सामने आ जाएं, तो विरोधियों को राजनीतिक हमला करने का अवसर मिल सकता है।

पार्क की जमीन को लेकर जारी विवाद में स्थानीय जनता की नाराजगी, पार्षद की भूख हड़ताल और विधायक की अस्पताल संबंधी योजना प्रमुख मुद्दे बन गए हैं। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से आगे बढ़कर पार्टी संगठन तक पहुंच सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें जिलाधिकारी मनीष बंसल और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन जमीन के अभिलेखों, जनहित और प्रस्तावित उपयोग की समीक्षा कर क्या निर्णय लेता है। साथ ही भाजपा का स्थानीय और प्रदेश नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल हिमाचल कॉलोनी का पार्क आगरा में भाजपा के दो जनप्रतिनिधियों के बीच सियासी टकराव का केंद्र बन गया है।

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