

Gramin Zameen Patta Allocation Rules: ग्रामीण क्षेत्रों में मकान या जमीन का कानूनी मालिकाना हक पाने के लिए पट्टा आवश्यक दस्तावेज है। गांवों में लोग लंबे समय से पुस्तैनी मकानों में रहते हैं, लेकिन उनके पास मालिकाना हक का कोई सरकारी दस्तावेज नहीं होता। पट्टा बनने से संपत्ति सुरक्षित हो जाती है और उस पर बैंक लोन भी आसानी से लिया जा सकता है।
यह दस्तावेज ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाता है तथा भू-विवादों से सुरक्षा प्रदान करता है। अब ग्राम पंचायत अथवा ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से पट्टे के लिए आवेदन किया जा सकता है। तहसील प्रशासन और पटवारी द्वारा जांच के बाद पात्र ग्रामीणों को पट्टा प्रमाण पत्र दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश के लेखपाल यज्ञ प्रकाश दीक्षित के अनुसार पट्टे की प्रक्रिया मुनादी कराकर शुरू होती है। रूप पत्र 1 जारी कर आवंटन योग्य जमीनों का चिन्हिकरण किया जाता है।
लैंड मैनेजमेंट कमेटी समीक्षा करके पात्र लोगों की सूची तैयार करती है। इसमें एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग और शहीद जवानों के परिजनों को पहली प्राथमिकता मिलती है। सूची तैयार होने के बाद तहसील कार्यालय में जमा की जाती है।
कानूनगो और नायब तहसीलदार जमीन का मूल्यांकन करते हैं। SDM और तहसीलदार की जांच के बाद 57 ख प्रपत्र तैयार होता है। इसके तहत कृषि, आवास, मत्स्य पालन व कुम्हारी के लिए पट्टा मिलता है।
ग्रामीण पट्टा बनवाने के लिए पहचान पत्र, राशन कार्ड या BPL कार्ड जरूरी है। निवास के सबूत के लिए बिजली-पानी का बिल अथवा हाउस टैक्स रसीद चाहिए। साथ ही फोटो, जमीन की चौहद्दी, खसरा-नक्शा और एक शपथ पत्र देना होता है।
शपथ पत्र में घोषणा करनी होती है कि जमीन पर वैध कब्जा है और वह सरकारी नहीं है। आवेदक ग्राम सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी या पंचायत सचिव से फॉर्म ले सकते हैं। फॉर्म भरकर दस्तावेजों के साथ इसे ग्राम पंचायत या तहसील कार्यालय में जमा करें।
कई राज्यों में ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। पोर्टल पर फॉर्म भरकर रसीद और शपथ पत्र अपलोड करके भी आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन मिलने के बाद पटवारी व राजस्व अधिकारी मौके पर जाकर निरीक्षण करते हैं। वे जांचते हैं कि कब्जा कितना पुराना है और जमीन सार्वजनिक श्रेणी में तो नहीं है। रिपोर्ट सकारात्मक होने पर ग्राम पंचायत की खुली बैठक में प्रस्ताव पास होता है।
फिर फाइल SDM के पास भेजी जाती है और निर्धारित शुल्क जमा कर पट्टा मिलता है। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि का ड्रोन से सर्वे हो रहा है। इस योजना से हर घर का डिजिटल मानचित्र बनाकर प्रॉपर्टी कार्ड दिए जा रहे हैं।
अगर गांव में ड्रोन सर्वे हो चुका है तो पटवारी या लेखपाल से स्टेटस जान सकते हैं। यह डिजिटल पहल गांवों में संपत्ति विवादों को खत्म कर ग्रामीणों को सशक्त बना रही है।