EMI चूकने का क्या होता है क्रेडिट स्कोर पर असर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Financial Impact Of Missing EMI: आज के दौर में EMI और क्रेडिट कार्ड हमारी रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन एक छोटी सी लापरवाही आपके क्रेडिट स्कोर और भविष्य में मिलने वाले लोन की शर्तों पर बहुत भारी पड़ सकती है। EMI मिस होने का फाइनेंशियल असर के बारे में जानकारी होना हर जिम्मेदार कर्जदार के लिए वर्तमान समय में अत्यंत आवश्यक है। समय पर भुगतान न करने से न केवल आपकी साख गिरती है बल्कि आपको हजारों रुपये का अतिरिक्त ब्याज भी चुकाना पड़ता है।
किसी भी प्रकार के लोन की रीपेमेंट हिस्ट्री आपके क्रेडिट स्कोर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है क्योंकि यह आपकी साख दर्शाती है। क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल में भुगतान के इतिहास का वेटेज लगभग 30 प्रतिशत तक होता है जो कि एक बहुत बड़ा हिस्सा है। इसलिए एक भी EMI चूकने से आपका सिबिल स्कोर तेजी से नीचे गिर सकता है और आपकी वित्तीय छवि खराब हो सकती है।
ट्रांसयूनियन सिबिल और एक्सपीरियन जैसी दिग्गज एजेंसियां आपके हर महीने के भुगतान का पूरा रिकॉर्ड बहुत ही सावधानी से रखती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि EMI या बिल भुगतान में 30 दिन से ज्यादा की देरी का असर आपके स्कोर पर तुरंत दिखाई देता है। यह लेट पेमेंट एंट्री आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में अगले 36 महीनों तक बनी रहती है और भविष्य की वित्तीय संभावनाओं को प्रभावित करती है।
कम क्रेडिट स्कोर होने से आपको भविष्य में मिलने वाले पर्सनल लोन या अन्य वित्तीय सेवाएं काफी महंगी हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर 10 लाख के लोन पर 700 से कम स्कोर होने पर आपको 14 प्रतिशत तक का भारी ब्याज देना पड़ सकता है। इससे पूरे लोन कार्यकाल के दौरान आपको 90,000 रुपये से अधिक का अतिरिक्त ब्याज भरना होगा जो एक बड़ी वित्तीय हानि है।
एक बार लापरवाही से स्कोर गिरने के बाद उसे वापस पुराने स्तर पर लाने के लिए काफी धैर्य, समय और कड़े अनुशासन की जरूरत होती है। कीवी के को-फाउंडर अनूप अग्रवाल के अनुसार नियमित और समय पर भुगतान जारी रखने से स्कोर में 6 से 12 महीने में सुधार दिखता है। अगर आप भविष्य में सभी भुगतान समय पर करते हैं तो यह नकारात्मक असर स्थायी नहीं रहता और आपकी साख फिर से बन सकती है।
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अगर आप किसी कारणवश गलती से अपनी EMI चूक गए हैं तो सबसे पहले बिना देरी किए बकाया राशि का तुरंत पूर्ण भुगतान करें। अगर यह देरी किसी तकनीकी समस्या के कारण हुई है तो इसकी जानकारी अपने संबंधित बैंक या लेंडर को तुरंत फोन या ईमेल पर दें। इससे भविष्य में बैंक के साथ आपके कारोबारी संबंधों और आपकी व्यक्तिगत विश्वसनीयता पर बहुत कम नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
आगे से ऐसी कोई भी वित्तीय गलती न हो इसके लिए अपने बैंक खाते में हमेशा ऑटो डेबिट की सुविधा सेट रखें और उसे सक्रिय रखें। अपने खाते में किस्त की राशि से थोड़ा अतिरिक्त बैलेंस रखना हमेशा एक बहुत ही समझदारी भरा और सुरक्षात्मक फैसला साबित होता है। ड्यू डेट से पहले मोबाइल पर रिमाइंडर लगाना और क्रेडिट लिमिट का संतुलित इस्तेमाल करना आपको भारी आर्थिक नुकसान से बचा सकता है।