बिना सर्टिफिकेट नहीं मिलेगी CNG, IGL ने बदले नियम, गैस भरवाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

CNG Hydro Test: इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड यानी IGL ने CNG गाड़ियों के लिए नियम सख्त कर दिए हैं, जिसके तहत बिना वैध हाइड्रो टेस्ट सर्टिफिकेट दिखाए अब वाहनों में CNG गैस नहीं भरी जाएगी।
IGL CNG Hydro Test Rules
CNG गैस(सोर्स- सोशल मीडिया)
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IGL CNG Hydro Test Rules: इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड यानी IGL ने CNG चालकों के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया है। हाल ही में दिल्ली के CNG पंप पर हुए हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया गया है।

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जब तक CNG सिलेंडर का वैध हाइड्रो टेस्ट सर्टिफिकेट नहीं दिखाया जाएगा, तब तक CNG नहीं भरी जाएगी। IGL ने अपने 10 CNG स्टेशनों पर ऑटोमैटेड वाहन पहचान और वेरिफिकेशन प्रणाली शुरू की है, जिससे फर्जीवाड़े पर तुरंत रोक लग सके।

हाइड्रो टेस्ट सर्टिफिकेट अनिवार्य, बिना सर्टिफिकेट नहीं मिलेगी CNG

IGL ने CNG पंपों पर सुरक्षा नियमों को सख्त करते हुए ‘नो सर्टिफिकेट, नो CNG’ व्यवस्था लागू की है। इसके तहत CNG भरवाने से पहले वाहन के सिलेंडर का वैध हाइड्रो टेस्ट सर्टिफिकेट दिखाना जरूरी होगा। कंपनी की ओर से चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने वाहन में CNG सिलेंडर का वैध परीक्षण प्रमाणपत्र रखें और जांच के दौरान पंप कर्मचारियों को उपलब्ध कराएं। 

केवल सिलेंडर पर लगी टेस्ट प्लेट पर्याप्त नहीं मानी जाएगी, बल्कि वैध प्रमाणपत्र भी जरूरी होगा। इस कदम का उद्देश्य ऐसे वाहनों में CNG भरने से रोकना है, जिनके सिलेंडर का सुरक्षा परीक्षण पूरा नहीं हुआ है या जिसकी परीक्षण अवधि समाप्त हो चुकी है। IGL ने CNG उपभोक्ताओं से समय पर सिलेंडर की जांच कराने की अपील की है।

कैमरे और डिजिटल रिकॉर्ड से होगी सिलेंडर की जांच

IGL की सुरक्षा व्यवस्था में वाहन और सिलेंडर की जानकारी की जांच पर जोर दिया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक, CNG सिलेंडर की वैधता और परीक्षण प्रमाणपत्र की जानकारी अधिकृत रिकॉर्ड के आधार पर जांची जाती है।

पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन यानी पेसो से अधिकृत हाइड्रो टेस्टिंग सेंटरों की सूची भी IGL उपलब्ध कराता है। दिल्ली-NCR में कई अधिकृत केंद्रों पर CNG सिलेंडर की जांच कराई जा सकती है।

IGL CNG Hydro Test Rules
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हर 3 साल में हाइड्रो टेस्ट जरूरी

CNG सिलेंडर की सुरक्षा के लिए समय-समय पर हाइड्रो टेस्ट कराया जाता है। IGL की सुरक्षा जानकारी के अनुसार, वाहन में लगे CNG सिलेंडर की परीक्षण अवधि 3 साल है। समय सीमा पूरी होने पर सिलेंडर का दोबारा परीक्षण कराना जरूरी है।

हाइड्रो टेस्ट में सिलेंडर की मजबूती और दबाव सहने की क्षमता की जांच की जाती है। CNG बहुत अधिक दबाव पर भरी जाती है, इसलिए सिलेंडर की नियमित जांच सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

यदि आपके वाहन के CNG सिलेंडर की हाइड्रो टेस्ट अवधि पूरी हो चुकी है, तो अधिकृत सेंटर से दोबारा जांच कराकर वैध सर्टिफिकेट लेना जरूरी है। इसके बाद ही CNG पंप पर ईंधन भरवाने में परेशानी से बचा जा सकेगा।

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