

PNG Connection Incentive Scheme: केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों घरों की रसोई में एलपीजी सिलेंडर की जगह पीएनजी पहुंचाने के लिए एक बड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस ऐतिहासिक पहल के तहत उपभोक्ताओं को हर महीने सिलेंडर बुक करने के झंझट से मुक्ति मिलेगी और सस्ती गैस मिलेगी।
यह शानदार प्रोत्साहन योजना अगले 10-11 दिनों के बाद यानी 1 सितंबर 2026 से पूरे देश में लागू कर दी जाएगी। हालांकि इस नई सरकारी योजना का वित्तीय प्रोत्साहन सीधे तौर पर गैस वितरण कंपनियों को दिया जाएगा, लेकिन इसका वास्तविक और अंतिम लाभ देश के आम उपभोक्ताओं के बजट को कम करके उन तक पहुंचेगा।
सुरक्षा के नजरिए से पाइप वाली नेचुरल गैस यानी पीएनजी बहुत अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मानी जाती है। जमीन के नीचे बिछी सुरक्षित पाइपलाइनों के जरिए कम दबाव पर इसकी सप्लाई की जाती है, जिससे सिलेंडर को उठाने और रखने से जुड़े तमाम गंभीर खतरे पूरी तरह से समाप्त हो जाते हैं।
इसके साथ ही उपभोक्ताओं को केवल उतनी ही गैस के लिए भुगतान करना होता है जितनी गैस वे इस्तेमाल करते हैं। यह स्वच्छ ईंधन होने के कारण रसोई के अंदर की हवा को साफ रखता है और हानिकारक कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करता है, जिससे पर्यावरण को भी बहुत बड़ा फायदा पहुंचता है।
सरकार ने नेचुरल गैस एंड पेट्रोलियम डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026 के तहत मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाया है। नए नियमों के लागू होने से बुनियादी ढांचे के विकास के आवेदनों का तेजी से निपटारा होगा और मानक राइट-ऑफ-वे चार्ज तय होने से कंपनियों का काम बहुत सुगम हो जाएगा।
योजना के तहत राज्यों को गैस पर वैट घटाकर केवल 5 प्रतिशत करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। देश में नेशनल पीएनजी ड्राइव 2.0 अभियान चलाकर एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करने के लिए सिंगल रजिस्ट्रेशन पोर्टल बनाया जाएगा, जिससे आम लोगों के लिए नया कनेक्शन लेना आसान हो जाएगा।
इस नई योजना के तहत घरेलू स्तर पर उत्पादित सस्ती एपीएम गैस की अतिरिक्त 200 एससीएम मात्रा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को आवंटित की जाएगी। अतिरिक्त सस्ती गैस मिलने से कंपनियां अपनी लागत में बड़ी कटौती कर सकेंगी और नए घरेलू नेटवर्क का तेजी से विस्तार करने में सफल होंगी।
इस विशेष योजना को छह महीने की अवधि में दो चरणों में लागू किया जाएगा। अतिरिक्त गैस मिलने से कंपनियों के पूंजीगत खर्च का पेबैक पीरियड 10 साल से घटकर केवल 3 साल रह जाएगा, जिससे कंपनियां देश भर की घनी शहरी कॉलोनियों और ऊंची इमारतों में तेजी से काम पूरा कर सकेंगी।