तमिलनाडु के शिवकाशी स्थित प्राचीन मंदिर।
Tamil Nadu Tourism : भारत की विविधता के बारे में एक मशहूर कहावत है-कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी। इसका अर्थ है यहां हर कोस पर पानी का स्वाद बदलता और हर चार कोस पर भाषा बदलती है। हर राज्य और शहर की अपनी खास पहचान है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हिंदी बोली जाती है, वहीं दक्षिण भारतीय राज्यों की अपनी अलग भाषाएं हैं।
इन खासियतों और प्राकृतिक सुंदरता के आधार पर कई शहरों को विशेष उपनाम मिले हैं। ऐसा ही एक शहर है, जिसे मिनी जापान कहा जाता है। हैरानी की बात है कि इसे यह नाम किसी पर्यटन स्थल की वजह से नहीं, बल्कि औद्योगिक अनुशासन और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन के कारण मिला है।
तमिलनाडु में स्थित शिवकाशी वह शहर है जिसे मिनी जापान या स्थानीय भाषा में कुट्टी जापान कहा जाता है। 15वीं शताब्दी में पांड्य राजाओं द्वारा बसाए गए इस शहर का इतिहास 600 साल से भी पुराना है। एक पौराणिक कथा के अनुसार 15वीं सदी में मदुरै के राजा हरीकेसरी परक्कीरामा पांडियन काशी से शिवलिंग लाए थे। रास्ते में गाय के रुक जाने पर वहीं शिवलिंग स्थापित कर दिया गया। काशी से लाए गए शिवलिंग के कारण इस स्थान का नाम शिवकाशी पड़ा।
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे यह नाम दिया था। तमिल में कुट्टी का अर्थ छोटा होता है, इसलिए कुट्टी जापान यानी मिनी जापान कहते हैं। मदुरै से 74 किलोमीटर दूर स्थित यह शहर भारत के पटाखा, माचिस और प्रिंटिंग उद्योग का प्रमुख केंद्र है। देश के कुल पटाखा उत्पादन का लगभग 70 फीसदी हिस्सा यहीं से आता है। इस कारण इसे फायरक्रैकर कैपिटल ऑफ इंडिया भी कहा जाता है।
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शिवकाशी की खासियत इसके छोटे-छोटे उद्योगों का सुसंगठित और कुशल संचालन है। यहां के उद्योगों में 7 लाख से अधिक लोग काम करते हैं। जापानी औद्योगिक संस्कृति की तरह यहां भी अनुशासन और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, जिसने इस शहर को वैश्विक पहचान दिलाई है। यहां हर साल अलग-अलग देशों से काफी अधिक संख्या में लोग घूमने आते हैं। हाल के वर्षों में पर्यटकों की संख्या में जबर्दस्त इजाफा देखने को मिला है।