भोपाल के पास है माँ विजयासन देवी का भव्य धाम, भक्तों की सभी मनोकामनाएं होती हैं पूरी

Maa Bijasan Mata Mandir: भोपाल से करीब 80 किलोमीटर दूर माँ विजयासन देवी का भव्य धाम है। इस धाम में माँ अपने भक्तों की हर पुकार सुनती है। इस दिव्य दरबार में लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
Maa Bijasan Mata Mandir
सलकनपुर माता मंदिर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Salkanpur Mata Mandir: क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 80 किलोमीटर दूर एक ऐसा आस्था का केंद्र है, जहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। यह पवित्र स्थल सलकनपुर में स्थित मां विजयासन देवी का मंदिर है। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की ऊंचाई पर लगभग 1000 फीट पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था और आकर्षण का केंद्र है।

शारदीय नवरात्र के दौरान यहां देशभर से लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और माँ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यताओं के अनुसार जब देवता 'रक्तबीज' नामक भयंकर राक्षस के अत्याचारों से त्रस्त हो गए थे। तब देवी पार्वती ने विकराल रूप धारण करके इसी स्थान पर उसका अंत किया था।

रक्तबीज वध से जुड़ी पौराणिक कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं को ‘रक्तबीज’ नामक असुर से मुक्ति दिलाने के लिए देवी पार्वती ने उग्र रूप धारण किया था। कहा जाता है कि इसी स्थल पर देवी ने रक्तबीज का संहार किया। इस विजय के बाद देवताओं ने उन्हें विशेष आसन अर्पित किया। जिससे यह स्थान ‘विजयासन धाम’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मां विजयासन को संकट हरने वाली देवी माना जाता है और कई भक्त उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।

बंजारों ने बनवाया माँ का मंदिर

इस मंदिर के निर्माण से जुड़ी कथा भी काफी दिलचस्प है। लगभग 300 साल पहले कुछ बंजारे अपने पशुओं के साथ यहां रुके थे। तभी अचानक उनके जानवर गायब हो गए, तलाश के दौरान एक बुजुर्ग बंजारे को एक छोटी कन्या मिली। जिसने पत्थर फेंककर देवी स्थल की ओर इशारा किया और पूजा करने को कहा। बंजारों ने जैसे ही वहां पूजा की उनके सभी पशु वापस मिल गए। इस घटना के बाद उन्होंने यहां मंदिर का निर्माण कराया।

सलकनपुर के पास हैं यह सुंदर जगहें

सलकनपुर आने वाले श्रद्धालु सीहोर जिले के अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण कर सकते हैं। गोपालपुर गांव का सिद्ध गणेश मंदिर जिसे राजा विक्रमादित्य काल से जोड़ा जाता है और जिसका जीर्णोद्धार पेशवा बाजीराव ने कराया था यह खास आकर्षण है। इसके अलावा बुदनी के पास स्थित सरू-मारू गुफाएं एक प्राचीन बौद्ध स्थल हैं, जहां सम्राट अशोक के शिलालेख मिलते हैं। सीहोर के नजदीक कुंवर चैन सिंह की समाधि और 1838 में बना ऑल सेंट चर्च भी ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

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