जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा (सौ. सोशल मीडिया)
आस्था का प्रतीक जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल की तरह इस बार भी निकाली जा रही है। इस रथ यात्रा में भगवान भक्तों के बीच रथ पर सवार होते हैं। बता दें कि यह दुनिया की सबसे प्राचीन और भव्य रथ यात्रा है। जिसमें देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होने आते हैं। माना जाता है कि व्यक्ति अगर इस यात्रा में भाग लेता है या रथ की रस्सी खींचता है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर कोई अपने जीवन में एक न एक बार इस रथ यात्रा को अनुभव करना चाहता है।
उड़ीसा के पुरी में हर साल लाखों श्रद्धालु जगन्नाथ भगवान के रथ को खींचते हैं। यह परंपरा सालों से चली आ रही है जिसमें भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। अगर आप भी इस पवित्र जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होना चाहते हैं, तो योजना बनाकर आ सकते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पुरी रथ यात्रा की शुरुआत होती है। इस साल रथ यात्रा 27 जून 2025 को शुरू होगी। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ पहले गुंडीचा मंदिर जाते हैं तो उनकी मौसी का घर है। इसके बाद रथ यात्रा निकाली जाती है। इस दिन भगवान तीन भव्य और आकर्षक रथ पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडीचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा नौ दिनों तक चलती है और 5 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। जिसके बाद पुनः भगवान जगन्नाथ को बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ श्रीमंदिर में स्थापित किया जाएगा।
जगन्नाथ यात्रा के दौरान काफी भीड़ होती है तो ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों को खास ध्यान रखें। साथ ही अपने साथ कम सामान रखें ताकि आपको परेशानी न हो। इसके अलावा मौसम की जानकारी लेकर ही कपड़ों की पैकिंग करें।
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जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए आपको पहले पुरी पहुंचना होगा। हवाई जहाज से जाना चाहते हैं तो पुरी से नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर है जहां से आपको टैक्सी या बस से पुरी की यात्रा करनी होगी।
अगर आप बजट में ट्रैवल करना चाहते हैं तो इसके लिए रेल यात्रा का ऑप्शन चुन सकते हैं। पुरी रेलवे स्टेशन से जगन्नाथ मंदिर की दूरी करीब तीन किमी है। इसके अलावा आप सड़क मार्ग भी चुन सकते हैं। जिसके लिए आपको भुवनेश्वर और कोणार्क से पुरी के लिए सरकारी और निजी बसें मिल जाएंगी।