खाटू श्याम मंदिर के दर्शन करने जा रहे हैं, तो ध्यान रखें ये बातें
राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक खाटू श्याम मंदिर सीकर जिले में स्थित है। कहा जाता है कि बाबा खाटू श्याम की पूजा व आराधना करने से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं।
- Written By: प्रीति शर्मा
खाटू श्याम मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)
Khatu Shyam Temple: राजस्थान के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक खाटू श्याम मंदिर सीकर जिले में स्थित है। कहा जाता है कि बाबा खाटू श्याम की पूजा व आराधना करने से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं। इस वजह से कई लोग भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं। नए साल की शुरुआत करने के लिए इस मंदिर में घूमने का प्लान किया जा सकता है। परिवार के साथ यहां पर जाकर भगवान का आर्शीवाद लेने से पूरा साल अच्छा गुजरेगा। लेकिन यहां पर जाने से पहले कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पौराणिक कथाओं के अनुसार बाबा खाटू श्याम को बर्बरीक थे। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण बर्बरीक के बलिदान को देखकर काफी खुश हुए थे और उन्हें वरदान दिया था। भगवान कृष्ण ने कहा था कि कलयुग में वह श्याम के नाम से पूजे जाएंगे। इस वजह से भक्त खाटू श्याम जी की उपासना सच्चे मन से करते हैं। मान्यताओं के अनुसार जो भक्त सच्चे मन से खाटू श्याम की पूजा व अर्चना करते हैं उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।
रखें इन बातों का ध्यान
अगर आप खाटू श्याम मंदिर में पूजा करने जा रहे हैं, तो कुछ बातों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। बाबा खाटू श्याम के दर्शन करने के समय मन में किसी भी प्रकार का द्वेष, घृणा का भाव नहीं होना चाहिए। इन सबको त्याग कर पूर्ण श्रद्धाभाव से मंदिर में प्रवेश करना चाहिए। पूजा के दौरान सभी सामग्री लेकर जाएं। बता दें कि बाबा खाटू श्याम जी को कच्चा दूध बेहद प्रिय है। उनके लिए आप गाय के कच्चे दूध का भोग लगा सकते हैं।
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खाटू श्याम मंदिर में अक्सर लोग निशान लेकर जाते हैं उसके साथ ही मंदिर की परिक्रमा करनी चाहिए। कहा जाता है कि बाबा खाटू श्याम की परिक्रमा कर निशान चढ़ाने से हर इच्छा पूरी होती है।
बाबा खाटू श्याम जी के दर्शन करने अगर आप पहली बार जा रहे हैं, तो उनकी विशेष आरती में जरूर शामिल होना चाहिए। बाबा श्याम की आरती का समय मंगला आरती सुबह 5.30 बजे, श्रृंगार आरती सुबह 8 बजे है। इसके बाद भोग आरती दोपहर 12.30 बजे, संध्या आरती शाम 6.30 बजे और शयन आरती रात 9.00 बजे होती है। इस समय आप आरती में शामिल हो सकते हैं और भगवान का आर्शीवाद ले सकते हैं।
