नासा के रोवर ने मंगल पर रिकॉर्ड किया ‘डांसिंग डस्ट’, ब्रिटेन की न्यूक्लियर तकनीक से घटेगा पृथ्वी से दूरी का समय
नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL) ने इस दृश्य को ‘डांसिंग डस्ट’ नाम से अपनी वेबसाइट पर वीडियो के साथ साझा किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अद्भुत दृश्य मंगल के मौसमी स्वरूप को समझने में काफी उपयोगी सिद्ध होगा।
- Written By: सिमरन सिंह
नासा के रोवर ने मंगल पर रिकॉर्ड किया ‘डांसिंग डस्ट’, ब्रिटेन की न्यूक्लियर तकनीक से घटेगा पृथ्वी से दूरी का समय (सौ. X)
नवभारत टेक डेस्क: नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर से एक दुर्लभ दृश्य को कैमरे में कैद किया है। इस दृश्य में एक विशाल धूल का बवंडर, छोटे बवंडर को निगलता हुआ दिखाई दे रहा है। नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL) ने इस दृश्य को ‘डांसिंग डस्ट’ नाम से अपनी वेबसाइट पर वीडियो के साथ साझा किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अद्भुत दृश्य मंगल के मौसमी स्वरूप को समझने में काफी उपयोगी सिद्ध होगा।
कितना बड़ा था यह बवंडर?
- बड़ा बवंडर: लगभग 210 फीट चौड़ा और 1,300 फीट ऊंचा, जो लगभग 1 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आगे बढ़ रहा था।
- छोटा बवंडर: जिसकी चौड़ाई लगभग 16 फीट थी और ऊंचाई बड़े बवंडर के समान थी, जिसे बड़े बवंडर ने अपनी लपेट में ले लिया।
पर्सिवियरेंस रोवर के नेविगेशन कैमरे ने इन क्षणों को रिकॉर्ड किया, जो अब मंगल ग्रह की जलवायु और धूल भरी गतिविधियों के अध्ययन में मदद करेगा।
मंगल तक की यात्रा अब होगी आसान
मंगल ग्रह तक इंसानी पहुंच को आसान बनाने की दिशा में ब्रिटेन नई तकनीक पर काम कर रहा है। ‘स्काईबर्ड’ नाम की एक उन्नत न्यूक्लियर रॉकेट तकनीक पर तेजी से काम हो रहा है, जो पृथ्वी और मंगल के बीच यात्रा के समय को लगभग आधा कर देगी।
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रॉकेट की विशेषताएं
यह न्यूक्लियर रॉकेट पृथ्वी की कक्षा में एक यान से जुड़कर उसे उच्च गति से गंतव्य तक पहुंचाएगा। इसकी अनुमानित गति 500,000 मील प्रति घंटा होगी। इस परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक अंतरिक्ष यात्रा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
