

Restored iPhone: Apple के नए iPhone लॉन्च के साथ ही सेकेंड-हैंड और रिफर्बिश्ड iPhone की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है। जिसकी बड़ी वजह नए फ्लैगशिप मॉडल की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं। साथ ही रिफर्बिश्ड डिवाइस प्लेटफॉर्म Cashify जानकारी दी है कि महंगे नए iPhone की वजह से कई ग्राहक Apple के इकोसिस्टम में एंट्री के लिए पुराने और कम कीमत वाले मॉडल का रुख कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में पुराने iPhone की खरीद-बिक्री में तेजी देखने को मिल सकती है।
Cashify का अनुमान है कि नए iPhone लॉन्च के 30 दिनों के भीतर पुराने डिवाइस के Buyback में बढ़ोतरी शुरू हो सकती है। इसके बाद अगले 60 से 90 दिनों में यह रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे पुराने मॉडल की उपलब्धता बढ़ेगी, फेस्टिव ऑफर्स आएंगे और ज्यादा यूजर्स अपग्रेड करेंगे वैसे-वैसे ट्रेड-इन मार्केट में भी हलचल बढ़ सकती है। साथ ही कंपनी का कहना है कि iPhone 15 और iPhone 16 सीरीज के Buyback में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं बड़े इंस्टॉल्ड बेस की वजह से iPhone 13 और iPhone 14 भी सेकेंडरी मार्केट में बड़ी संख्या में पहुंच सकते हैं।
जानकारी में Cashify के आंकड़े बताते हैं कि 2025 में उसके प्लेटफॉर्म पर रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन बिक्री में Apple की हिस्सेदारी 65.3 फीसदी रही थी। वहीं कुल Buyback में Apple डिवाइस की हिस्सेदारी 32.6 फीसदी थी। इसमें खास बात यह है कि iPhone 13 सबसे ज्यादा बिकने वाला रिफर्बिश्ड iPhone होने के साथ सबसे ज्यादा ट्रेड-इन किया जाने वाला मॉडल में भी शामिल रहा है। Buyback में इसकी हिस्सेदारी 6.93 फीसदी थी जबकि रिफर्बिश्ड डिमांड में यह आंकड़ा 15.5 फीसदी रहा। इससे संकेत मिलता है कि इस मॉडल की मांग उपलब्ध सप्लाई से ज्यादा रही।
देखा जा रहा है कि करीब 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा खर्च करने से बचने वाले ग्राहक पुराने iPhone की ओर जा सकते हैं। हालांकि ज्यादा सप्लाई आने पर पुराने मॉडल की कीमत घटनी चाहिए लेकिन नए iPhone की ऊंची कीमतें इस गिरावट को सीमित कर सकती हैं। जिससे सीधा सकेत मिलता है कि कीमतों में अचानक बड़ी कटौती के बजाय धीरे-धीरे नरमी देखने को मिल सकती है।
ऐसे में आने वाले समय में iPhone 14 और 15 की मांग बढ़ने की उम्मीद है। वहीं iPhone 16 अपनी ज्यादा रीसेल वैल्यू के कारण शुरुआत में प्रीमियम रिफर्बिश्ड कैटेगरी में रह सकता है। इस बाजार में वारंटी, बैटरी हेल्थ और डिवाइस सर्टिफिकेशन भी खरीदारों के लिए पहले से ज्यादा अहम हो सकते हैं।