अमेरिका में Google के खिलाफ एंटी-ट्रस्ट सुनवाई, Apple ने रखा अपना पक्ष
इस केस में गूगल के क्रोम ब्राउजर और एंड्रॉयड सेवाओं को अलग करने का प्रस्ताव दिया गया है। अब इस मामले में टेक दिग्गज एपल ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वह सर्च इंजन के लिए सिर्फ गूगल पर निर्भर नहीं रह सकता।
- Written By: सिमरन सिंह
Google vs Apple को लेकर क्या मामल चल रहा है। (सौ. Design)
नवभारत टेक डेस्क: अमेरिका में गूगल के खिलाफ चल रही एंटी-ट्रस्ट सुनवाई ने इंटरनेट सर्च और टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। इस केस में गूगल के क्रोम ब्राउजर और एंड्रॉयड सेवाओं को अलग करने का प्रस्ताव दिया गया है। अब इस मामले में टेक दिग्गज एपल ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वह सर्च इंजन के लिए सिर्फ गूगल पर निर्भर नहीं रह सकता।
गूगल-एपल समझौते की पृष्ठभूमि
एपल और गूगल के बीच सर्च इंजन को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता है। इसके तहत गूगल, एपल के डिवाइस जैसे iPhone, iPad और MacBook में डिफॉल्ट सर्च इंजन बने रहने के लिए हर साल अरबों डॉलर का भुगतान करता है। 2022 में ही एपल को इस समझौते के तहत 20 अरब डॉलर का भुगतान किया गया।
एंटी-ट्रस्ट केस में एपल की रणनीति
एपल ने कोर्ट में साफ किया है कि वह गूगल से मिलने वाले राजस्व के बावजूद इस एकाधिकार विरोधी सुनवाई में तटस्थ रहेगा। कंपनी के वकीलों ने यह भी स्पष्ट किया कि एपल सर्च इंजन के क्षेत्र में गूगल से प्रतिद्वंद्विता नहीं रखना चाहता। एपल ने अपनी याचिका में कहा है कि अप्रैल 2025 में शुरू होने वाली सुनवाई में वह अपने गवाहों को पेश करेगा।
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अभियोजकों की मांग
एंटी-ट्रस्ट केस में अभियोजकों का दावा है कि गूगल का इंटरनेट सर्च के क्षेत्र में एकाधिकार प्रतिस्पर्धा को खत्म कर रहा है। उनकी मांग है कि गूगल के क्रोम ब्राउजर और एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को कंपनी से अलग किया जाए। ऐसा होने पर ऑनलाइन सर्च इंडस्ट्री में नए खिलाड़ियों के लिए जगह बनेगी। हालांकि, इससे गूगल को भारी वित्तीय नुकसान होने की संभावना है।
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क्या होगा गूगल का भविष्य?
इस सुनवाई का असर इंटरनेट सर्च इंडस्ट्री और गूगल की सेवाओं पर गहरा हो सकता है। गूगल के लिए यह मामला न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि उसकी बाजार स्थिति के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
