

Threat Of AI To Humans: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अब तक नौकरियों पर असर, फेक न्यूज और साइबर हमलों जैसे खतरे चर्चा में सामने आ रहे थे। लेकिन अब OpenAI की सेफ्टी टीम से जुड़े रिसर्चर मार्कस विलियम्स के एक बयान ने बहस को और गंभीर बना दिया है। बता दें कि उनका कहना है कि अगर AI कंपनियों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ और सरकारों ने जरूरी नियम लागू नहीं किए तो आने वाले कुछ साल इंसानों के लिए बेहद जोखिम भरे हो सकते हैं।
बता दें कि विलियम्स ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर AI के विकास को नियंत्रित नहीं किया गया या बड़ी कंपनियां इसकी रफ्तार को मिलकर धीमा नहीं करती है तो मानव अस्तित्व पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। जब उनसे इस खतरे को प्रतिशत में बताने के लिए कहा गया तो उन्होंने अगले तीन साल में 70 फीसदी का अनुमान बताया है।
इस जानकारी के सामने आने के बाद से यहां सबसे जरूरी बात है कि 70% का आंकड़ा कोई वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं है। यह विलियम्स का अपना जोखिम आकलन है और इसके साथ एक शर्त जुड़ी हुई है। जिसमें इनका साफ तौर पर दावा यह नहीं है कि तीन साल बाद निश्चित रूप से दुनिया खत्म हो जाएगी। उनका तर्क है कि अगर AI का विकास मौजूदा रफ्तार से जारी रहा और सुरक्षा व रेगुलेशन के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए तो गंभीर जोखिम बढ़ सकते हैं। उन्होंने साथ ही माना कि AI के विकास की रफ्तार और नियमन को प्रभावित करना अभी भी संभव है।
मार्कस विलियम्स के बारे में बताए तो यह OpenAI की सेफ्टी ओवरसाइट टीम से जुड़े हैं और AI सुरक्षा से संबंधित रिसर्च पर काम करते हैं। उनके काम में ऐसे AI मॉडल के व्यवहार की निगरानी शामिल है जो तय सीमाओं को पार करने, गलत तरीके से इनाम हासिल करने या अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए अप्रत्याशित तरीके अपनाने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं OpenAI की रिसर्च में भी AI एजेंट्स के ऐसे व्यवहार की निगरानी पर काम किया गया है जिसमें मॉडल सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों को दरकिनार करने की कोशिश कर सकता है।
वैसे देखा जाए तो आज AI इंसानों की तरह स्वतंत्र रूप से दुनिया को नियंत्रित नहीं करता। लेकिन इसकी क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं आधुनिक AI मॉडल कोड लिखने, इंटरनेट पर जानकारी खोजने, सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने और कई कामों को एजेंट की तरह खुद पूरा करने में सक्षम हो रहे हैं। वहीं देखा जा रहा है कि यही AI सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता का बड़ा कारण है। ऐसे में भविष्य में अगर अत्यधिक सक्षम AI सिस्टम को इंटरनेट, कंप्यूटर, वित्तीय संसाधनों या दूसरे महत्वपूर्ण सिस्टम तक व्यापक पहुंच मिलती है और उसके लक्ष्य इंसानी हितों से अलग हो जाते हैं तो उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
इस सवाल के जवाब में कहा जा रहा है कि ऐसा नहीं है। AI के संभावित अस्तित्वगत खतरे को लेकर विशेषज्ञों के अनुमान काफी अलग-अलग हैं। कुछ शोधकर्ताओं ने अगले दशक में इस तरह के जोखिम की संभावना 10% से ज्यादा बताई है जबकि जेफ्री हिंटन भी AI के संभावित अस्तित्वगत खतरे को लेकर चिंता जता चुके हैं। इसलिए 70% आंकड़े को स्थापित वैज्ञानिक तथ्य के बजाय एक विशेषज्ञ का जोखिम अनुमान समझना जरूरी है।
AI से इंसानों के खत्म होने की कोई प्रमाणित संभावना आज उपलब्ध नहीं है। असली बहस इस बात पर है कि AI जितना शक्तिशाली होता जाएगा उसके साथ सुरक्षा, नियंत्रण और रेगुलेशन को उतनी ही तेजी से मजबूत कैसे किया जाए। क्योंकि किसी भी चीज का हद से आगे जाना खराब ही रहा है, ऐसे में AI को लेकर चिंता करना लाजमी है।