सांकेतिक तस्वीर (Image- Social Media)
OTT Platforms Ban: भारत में ऑनलाइन कंटेंट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ गलत और आपत्तिजनक सामग्री की समस्या भी सामने आ रही है। इसी कारण सरकार और संसद की समितियां अब OTT प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती बढ़ा रही हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 से 15 OTT प्लेटफॉर्म्स नियमों के उल्लंघन के आरोप में जांच के दायरे में हैं।
संसदीय समिति ने बताया कि कई प्लेटफॉर्म्स पर गैर-कानूनी और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने के आरोप लगे हैं। Ministry of Information and Broadcasting के अनुसार पहले 25 प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया गया था, जिसके बाद 18 अन्य पर भी कार्रवाई की गई। फिलहाल 10–15 प्लेटफॉर्म्स की जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर इन्हें भी ब्लॉक किया जा सकता है। इसका उद्देश्य इंटरनेट पर सुरक्षित और स्वच्छ कंटेंट सुनिश्चित करना है।
फरवरी में सरकार ने MoodXVIP, Koyal Playpro, Digi Movieplex, Feel और Jugnu जैसे कुछ OTT प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया था। इन पर अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री दिखाने का आरोप था, जो IT Rules 2021 का उल्लंघन करता है। इससे पहले 2025 में भी 25 से अधिक ऐप्स पर कार्रवाई की गई थी, जिनमें कुछ लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स शामिल थे।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि OTT और ऑनलाइन मीडिया से जुड़े मौजूदा नियमों में कुछ कमियां हैं। इसलिए एक मजबूत और स्पष्ट रेगुलेशन सिस्टम की जरूरत है, जिससे गलत कंटेंट पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके। सरकार चाहती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी और अधिक सख्ती से हो।
फेक न्यूज को लेकर भी चिंता जताई गई है। Press Information Bureau की फैक्ट चेक यूनिट इस दिशा में काम कर रही है और अब तक करीब 1400 URLs को ब्लॉक कर चुकी है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि फेक कंटेंट रोकने के लिए AI टूल्स का ज्यादा उपयोग किया जाए और इस काम के लिए बहुभाषी विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाई जाए।
इस मामले ने कानूनी रूप भी ले लिया है। 10 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर सुनवाई की बात कही। यह मामला Bombay High Court के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें PIB फैक्ट चेक यूनिट को रद्द किया गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे मामला और महत्वपूर्ण हो गया है।
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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फेक न्यूज और भ्रामक ऑडियो-वीडियो क्लिप्स अक्सर बड़े आयोजनों—जैसे चुनाव, विरोध प्रदर्शन या अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं के दौरान तेजी से फैलती हैं। ऐसे में सरकार और संबंधित एजेंसियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि लोगों तक सही और विश्वसनीय जानकारी पहुंच सके।