

Sports Genomics Initiative Athlete Genetic Testing: गुजरात ने खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचानने और उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। राज्य ने 'स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम' शुरू किया है। इसके जरिए खिलाड़ियों की आनुवंशिक, शारीरिक और प्रदर्शन से जुड़ी खूबियों को समझने की कोशिश की जाएगी।
गुजरात के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, गुजरात देश का पहला राज्य है जिसने इस तरह का स्पोर्ट्स जीनोमिक्स कार्यक्रम शुरू किया है।
कार्यक्रम के तहत इस साल करीब 2,000 खिलाड़ियों के सैंपल लिए जाएंगे। इसकी शुरुआत गुजरात स्टेट टेनिस एसोसिएशन के खिलाड़ियों से हो चुकी है। इसके बाद तीरंदाजी, फेंसिंग, जूडो और शूटिंग के खिलाड़ियों के सैंपल लिए जाएंगे। योजना के अनुसार हर साल करीब 2 हजार सैंपल की जांच की जाएगी। इस तरह पांच साल में करीब 10 हजार सैंपल जमा करने का लक्ष्य है।
इस कार्यक्रम में कई अलग-अलग खेलों के खिलाड़ियों को शामिल किया जाएगा। इनमें एथलेटिक्स, तैराकी, बॉक्सिंग, कुश्ती, जूडो, ताइक्वांडो, जिम्नास्टिक और फेंसिंग जैसे खेल शामिल हैं।
इसके अलावा फुटबॉल, हॉकी, हैंडबॉल, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, टेनिस, कबड्डी और खो-खो के खिलाड़ी भी इस योजना का हिस्सा होंगे। तीरंदाजी, शूटिंग और शतरंज जैसे खेलों को भी इसमें शामिल किया गया है।
स्पोर्ट्स जीनोमिक्स में ये जानने की कोशिश की जाती है कि शरीर की आनुवंशिक बनावट का मांसपेशियों, सहनशक्ति, ऊर्जा, चोट, रिकवरी और ट्रेनिंग के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया से किस तरह संबंध हो सकता है।
हालांकि, वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि किसी खिलाड़ी की सफलता केवल उसके जीन से तय नहीं होती। ट्रेनिंग, कोचिंग, खान-पान, सुविधाएं और माहौल भी खिलाड़ी के विकास में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में आनुवंशिक जानकारी को खिलाड़ियों के शारीरिक और प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों के साथ मिलाकर देखने की योजना है। इससे भविष्य में खिलाड़ियों के लिए उनकी जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग और पोषण की रणनीति तैयार करने में मदद मिल सकती है।
इस योजना के तहत गुजरात एथलीट जीनोम डेटाबेस (G-AGD) तैयार करने का प्रस्ताव है। इसमें खिलाड़ियों की आनुवंशिक, शारीरिक और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी को एक साथ रखा जाएगा।
राज्य का लक्ष्य इस पहल के जरिए स्पोर्ट्स बायोटेक्नोलॉजी इनोवेशन हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है। कार्यक्रम को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों से भी जोड़ा जा रहा है।
जीन से जुड़ी जानकारी बेहद निजी और संवेदनशील होती है। इसलिए खिलाड़ियों की पहचान और डेटा को सुरक्षित रखना इस कार्यक्रम की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसके लिए डेटा की सुरक्षा, सीमित पहुंच और दो-स्तरीय बारकोडिंग जैसे उपायों की योजना बनाई गई है।
यानी गुजरात अब खिलाड़ियों की प्रतिभा तलाशने के पारंपरिक तरीकों के साथ विज्ञान और जीन की जानकारी को भी जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद आने वाले समय में ऐसे खिलाड़ियों को तैयार करना है जो राज्य और देश के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदक जीत सकें।