

Highlights:
न्यूजीलैंड टी-20 सीरीज के बाद टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर का बड़ा बयान
गंभीर ने एक इंटरव्यू में अपनी मानसिक स्थिति और कोचिंग के अनुभवों को साझा किया
गंभीर ने कहा कि, ईमानदारी से कहूं तो, हां, मैं थका हूं
Indian Cricket Team Head Coach: भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि टीम इंडिया का कोच होने के भारी दबाव और बड़ी जिम्मेदारियों ने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई टी-20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में भारत की 3-2 से रोमांचक जीत के बाद गंभीर ने एक इंटरव्यू में अपनी मानसिक स्थिति और कोचिंग के अनुभवों को साझा किया। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वे इस दबाव को झेलने और परिस्थितियों को संभालने के लिए पूरी तरह से मजबूत हैं।
दरअसल, एक यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए गौतम गंभीर ने अपनी मानसिक स्थिति और भारतीय टीम के कोच पद के साथ आने वाले दबाव पर खुलकर बात की। गंभीर ने कहा कि, ईमानदारी से कहूं तो, हां, मैं थका हूं, लेकिन मैं इसे संभालने के लिए पर्याप्त मजबूत हूं। मैं जब तक संभव हो, इसे झेलने की ताकत रखता हूं।
मैं दबाव झेल सकता हूं, मैं आलोचनाओं की गोली खा सकता हूं। गंभीर ने आगे कहा कि आखिरकार वे भी एक इंसान हैं, इसलिए कभी-कभी थका हुआ महसूस करना स्वाभाविक है, लेकिन वे इसे अच्छे से संभालने में सफल रहे हैं।
टीम चयन और प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने के मुश्किल फैसलों पर गंभीर ने अपना कड़ा रुख साफ किया। उन्होंने कहा, "यह मेरा काम है। मैंने पहले भी कहा है कि मेरा काम सही फैसला लेना है, लोकप्रिय फैसला लेना नहीं।
गंभीर ने आगे समझाया, "ड्रेसिंग रूम में बैठकर ऐसे फैसले लेना बहुत आसान है जिससे लोग खुश हो जाएं, लेकिन मेरा काम ड्रेसिंग रूम को सुरक्षित रखना और उन लोगों को स्पष्टता और समर्थन देना है जिन्होंने लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन किया है।
बतौर मुख्य कोच गौतम गंभीर का अब तक का कार्यकाल ऐतिहासिक सफलताओं और कुछ बड़ी चुनौतियों का मिश्रण रहा है। उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी-20 विश्व कप 2026 जीतने जैसी ऐतिहासिक सफलताएं अपने नाम की हैं।
हालांकि, इसके उलट टेस्ट क्रिकेट में टीम को कुछ बेहद निराशाजनक हार का सामना भी करना पड़ा है। गंभीर ने माना कि पिछले 4-5 महीनों में लगातार अलग-अलग प्रारूप अलग परिस्थितियों और हर खिलाड़ी के अलग-अलग व्यवहार को मैनेज करने के कारण वे कई बार मानसिक रूप से काफी थकान महसूस करते हैं, लेकिन वे टीम को आगे ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।