

Asian Games 2026 India Performance: जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 अब अपने अंतिम चरण में है। रविवार को नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में समापन समारोह होगा। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक के साथ कुल 85 मेडल अपने नाम किए। यह एशियन गेम्स के इतिहास में भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले भारत ने 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित संस्करण में 107 पद जीते थे।
ऐसे में कई लोग सवाल कर रहे हैं कि जब सरकार हर साल खिलाड़ियों की ट्रेनिंग से लेकर उनकी फिटनेस पर जब करोड़ों अरबों रुपए लगाती है, तो फिर परिणाम उसके मुताबिक क्यों नहीं मिल रहे हैं? भारत ने 2023 में ऐसा क्या किया था कि उस संस्करण में खिलाड़ियों ने देश को रिकॉर्ड 107 मेडल दिलाए थे? इसके पीछे क्या कारण हैं? आइए आपको ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब देते हैं।
भारत के पिछले चार एशियन गेम्स के प्रदर्शन को देखें तो पदकों की संख्या में एक बड़ा बदलाव नजर आता है। 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में भारत ने 57 पदक जीते थे। इनमें 11 स्वर्ण, 9 रजत और 37 कांस्य शामिल थे। इसके बाद 2018 के जकार्ता-पालेमबांग एशियन गेम्स में भारतीय दल ने प्रदर्शन में सुधार करते हुए 70 पदक हासिल किए। इसमें 16 स्वर्ण, 23 रजत और 31 कांस्य पदक थे।
इसके बाद हांगझोउ 2023 में भारत ने पहली बार 100 का आंकड़ा पार किया और कुल 107 पदक जीते। एशियन गेम्स में यह भारत का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। वहीं 2026 में पदकों की संख्या घटकर 85 हो गई, लेकिन यह आंकड़ा 2014 और 2018 दोनों से अधिक रहा।
2023 और 2026 के एशियन गेम्स में पदकों की संख्या में अंतर के पीछे एक बड़ा कारण खिलाड़ियों की संंख्या भी है। 2023 में भारतीय दल में 655 खिलाड़ी शामिल थे, जो अब तक का भारत का सबसे बड़ा दल भी है। जबकि 2026 में भारतीय दल में खिलाड़ियों की संख्या 503 थी। 2023 के मुकाबले 2026 में भारतीय दल में 152 खिलाड़ी कम थे।
इसी प्रकार 2014 में भारत ने करीब 541 खिलाड़ियों का दल भेजा था, जबकि 2018 में यह संख्या करीब 570 रही थी। इसके बावजूद 503 खिलाड़ियों के दल ने 85 पदक जीते। यह बताता है कि केवल दल का आकार ही पदक प्रदर्शन तय नहीं करता, खिलाड़ियों की तैयारी, चयन, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं का अनुभव और सपोर्ट सिस्टम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण अंतर खेलों में हिस्सेदारी को लेकर भी है। एशियन गेम्स 2026 में कुल 43 खेलों का आयोजन किया गया, जबकि भारत ने सिर्फ 34 में ही दावेदारी पेश की। यानी भारत इन 9 खेलों में वैसे भी कोई भी पदक नहीं जीत सकता था।
इन 9 खेलों में फुटबॉल, बेसबॉल/सॉफ्टबॉल, बास्केटबॉल, ब्रेकिंग, हैंडबॉल, मॉडर्न पेंटाथलॉन, पैडल (Padel), स्केटबोर्डिंग और ट्रायथलॉन शामिल हैं। ऐसा नहीं है कि भारत में यह खेल खेले नहीं जाते। एशियन गेम्स में भारत इन खेलों के लिए टीमों को इसलिए नहीं भेज पाया क्योंकि या भारत जरूरी शर्तें पूरी नहीं कर पाई या फिर रैंकिंग क्वालीफाई करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। जबकि चीन और जापान जैसे देश अधिक से अधिक खेलों में हिस्सा लेते हैं।
भारत में खिलाड़ियों की तैयारी पर खर्च केवल एक योजना के तहत नहीं होता। खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS), SAI, राष्ट्रीय खेल महासंघों और अन्य योजनाओं के जरिए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, कोचिंग, उपकरण, डाइट, स्पोर्ट्स साइंस और मेडिकल सपोर्ट उपलब्ध कराया जाता है।
2026 एशियन गेम्स की तैयारी के लिए सरकार ने ACTC और TOPS के तहत कुल करीब ₹800.70 करोड़ खर्च किए। इसमें ट्रेनिंग कैंप, विदेशी प्रशिक्षण, कोच, विशेषज्ञ, उपकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से जुड़ा खर्च शामिल था।
इसके अलावा वित्त वर्ष 2026-27 में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय का कुल बजट बढ़ाकर करीब ₹4,480 करोड़ किया गया है। यह पूरी राशि सिर्फ खिलाड़ियों की ट्रेनिंग पर खर्च नहीं होती, बल्कि इसमें खेल बुनियादी ढांचा, प्रतिभा विकास, खेलो इंडिया और अन्य कार्यक्रम भी शामिल हैं। हालांकि एशियन गेम्स 2026 में भारत से ऊपर रहने वाली टॉप तीन देश अपने खिलाड़ियों पर जितना खर्च करते हैं उसकी तुलना में भारत कहीं पीछे है। चीन हर साल अपने खिलाड़ियों पर अरबों डॉलर खर्च करता है, जापान 6.79 अरब और साऊथ कोरिया 2,100 करोड़ रूपये खर्च करता है।
भारत के खेल बजट में पिछले वर्षों में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन एशियन गेम्स जैसे बड़े आयोजन में पदक सिर्फ सरकारी बजट का परिणाम नहीं होते। इसके पीछे प्रतिभा पहचान से लेकर लंबे समय तक चलने वाली कोचिंग, आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर, स्पोर्ट्स साइंस, पोषण, रिकवरी, अंतरराष्ट्रीय निवेश और उच्च स्तर के कोचिंग सिस्टम की भूमिका होती है।
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने लंबे समय से अपने एलीट खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग स्तर पर मजबूत हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम विकसित किए हैं। इसलिए सिर्फ सरकारी बजट की तुलना से यह तय नहीं किया जा सकता कि ज्यादा पैसा खर्च करने वाला देश निश्चित रूप से ज्यादा पदक जीतेगा।
2026 का प्रदर्शन भारत के लिए दो अलग तस्वीरें सामने रखता है। एक तरफ 107 पदकों का 2023 का रिकॉर्ड इस बार टूट नहीं सका। स्वर्ण पदकों की संख्या भी 28 से घटकर 21 रही। दूसरी तरफ 85 पदकों का आंकड़ा 2014 के 57 और 2018 के 70 पदकों से काफी ऊपर है।
इस लिहाज से भारत का एशियन गेम्स प्रदर्शन एक उतार-चढ़ाव वाले लेकिन लंबे समय में ऊपर जाते ट्रेंड को दिखाता है। अब चुनौती सिर्फ 2023 के 107 पदकों के रिकॉर्ड तक दोबारा पहुंचने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि अलग-अलग खेलों में भारत की पदक क्षमता लगातार बनी रहे।