वैभव सूर्यवंशी को करना होगा मौके का इंतजार, गौतम गंभीर बोले- उम्र नहीं, प्रतिभा मायने रखती है

Gautam Gambhir Statement: भारत-अफगानिस्तान T20 सीरीज के बाद कोच गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी पर कहा कि उन्हें अपने मौके का इंतजार करना होगा। उम्र नहीं, प्रतिभा मायने रखती है।
Gautam Gambhir Statement On Vaibhav Sooryavanshi
गौतम गंभीर और वैभव सूर्यवंशी (सोर्स - सोशल मीडिया)
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Gautam Gambhir On Vaibhav Sooryavanshi: भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की T20 सीरीज 3-0 से जीत ली। हालांकि, इस सीरीज में युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। सीरीज जीतने के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने वैभव को लेकर कहा कि उन्हें अपने मौके का इंतजार करना होगा।

गंभीर ने कहा कि भारतीय टीम मैनेजमेंट को वैभव की प्रतिभा और उनकी क्षमता के बारे में पता है। उन्होंने साफ किया कि भारत के लिए खेलने के मामले में खिलाड़ी की उम्र मायने नहीं रखती, लेकिन वैभव को फिलहाल अपने मौके का इंतजार करना होगा।

सैमसन-अभिषेक की जोड़ी पर जताया भरोसा

भारतीय टीम मैनेजमेंट ने T20 विश्व कप 2026 जीतने वाली ओपनिंग जोड़ी संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा पर भरोसा बनाए रखा। इस फैसले का टीम को फायदा भी मिला। दोनों ने सीरीज में मिलकर कुल 346 रन बनाए। अभिषेक ने 3 पारियों में 1 शतक और 1 अर्धशतक लगाया, जबकि सैमसन ने 2 अर्धशतक जड़े।

तीसरे T20 में दोनों ने पहले विकेट के लिए 142 रन की साझेदारी की। गंभीर ने कहा कि उनका नजरिया पहले से साफ था कि विश्व कप के दौरान जिस संयोजन के साथ टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया, उसी के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि कुछ मैचों में असफल होने से खिलाड़ी खराब नहीं हो जाते।

'उसे अपने मौके का इंतजार करना होगा'

वैभव सूर्यवंशी को लेकर गंभीर ने कहा कि उन्हें साफ तौर पर बताया गया है कि वो टीम में कहां खड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए खेलने की लाइन में उम्र कोई मायने नहीं रखती। टीम को पता है कि वैभव में कितनी प्रतिभा है और वो क्या कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें अपने मौके का इंतजार करना होगा।

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संजू सैमसन पर क्या बोले गंभीर?

गौतम गंभीर ने संजू सैमसन की प्रतिभा की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी के पास प्रतिभा नहीं होती तो वो विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट नहीं बन सकता। गंभीर ने ये भी बताया कि सैमसन को इंग्लैंड सीरीज से बाहर रखने का फैसला उनके कोचिंग करियर के सबसे मुश्किल फैसलों में से एक था।

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