पहले फतेह किया एशिया कप का किला, फिर जीता देश का दिल, सूर्या ने पहलगाम पीड़ितों को दान की मैच फीस

Asia Cup 2025: टीम इंडिया ने सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में पाकिस्तान को फाइनल में मात देकर एशिया कप 2025 का खिताब अपने नाम कर लिया। यह भारत की लगातार 9वीं एशिया कप ट्रॉफी जीत है।
पहले फतेह किया एशिया कप का किला, फिर जीता देश का दिल, सर्या ने पहलगाम पीड़ितों को दान की मैच फीस
सूर्यकुमार यादव अपनी पत्नी के साथ (फोटो- सोशल मीडिया)
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Suryakumar Yadav:  भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने दुबई में पाकिस्तान को हराकर एशिया कप 2025 का खिताब जीतने के बाद सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने घोषणा की कि इस टूर्नामेंट में मिली अपनी पूरी मैच फीस भारतीय सेना और पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवारों को दान करेंगे।

सूर्या ने सोशल मीडिया पर लिखा, “इस टूर्नामेंट की अपनी मैच फीस हमारे सशस्त्र बलों और पहलगाम के पीड़ित परिवारों की मदद के लिए दान करने का फैसला किया है। आप हमेशा मेरी यादों में रहेंगे।”

मैच फीस की दान

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रत्येक भारतीय खिलाड़ी को एक T20 मैच के लिए 4 लाख रुपये मिलते हैं। सूर्यकुमार ने सभी सात मैच खेले, जिससे कुल 28 लाख रुपये का दान सामने आया। यह कदम न केवल खेल भावना को दर्शाता है, बल्कि भारतीय कप्तान की सामाजिक जिम्मेदारी की झलक भी देता है।

फाइनल में भारत की शानदार जीत

फाइनल मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को पांच विकेट से हराया। तिलक वर्मा ने शानदार अर्धशतक जड़ा, जबकि संजू सैमसन और शिवम दुबे ने अहम योगदान दिया। इस जीत के साथ भारत ने लगातार तीसरी बार पड़ोसी देश पर जीत दर्ज की और टूर्नामेंट में अपना दूसरा T20 एशिया कप तथा कुल मिलाकर नौवां एशिया कप खिताब अपने नाम किया।

मीडिया के जरिए दी जानकारी

एशियन चैंपियन बनने के बाद मीडिया से बात करते हुए सूर्यकुमार ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपने सभी सात मैचों की फीस सेना और जरूरतमंदों को दान करने का निर्णय लिया। उन्होंने स्वीकार किया कि यह घोषणा थोड़ी लेट हो गई, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा समाज और देश की मदद करना रहा।

ट्रॉफी लेने से टीम इंडिया का इनकार

फाइनल के बाद भी विवाद जारी रहा। भारतीय टीम ने ACC प्रमुख और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इंकार कर दिया। टीम इंडिया चाहती थी कि ट्रॉफी उन्हें एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड के वाइस चेयरमैन खालिद अल जरूनी से दी जाए, लेकिन नकवी ने इसे अस्वीकार कर दिया। इंतजार के बाद आयोजकों ने ट्रॉफी को मंच से हटा दिया। खबर आई कि नकवी ट्रॉफी और मेडल अपने होटल लेकर चले गए, जिससे विवाद और बढ़ गया।

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