

Nana Patekar Special Bond With Cricket: भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रहे नाना पाटेकर का आज यानी गुरुवार, 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। आज सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। इस खबर की जानकारी लगते ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
नाना पाटेकर सिर्फ कैमरे के सामने ही उम्दा कलाकार नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी में खेल के, खासकर क्रिकेट के जबरदस्त शौकीन थे। बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका क्रिकेट से बेहद गहरा जुड़ाव था। दरअसल, साल 2015 में दिए एक इंटरव्यू में नाना ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए एक दिलचस्प खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि वह बचपन में एक बेहतरीन क्रिकेटर थे और कमाल की ऑफ-स्पिन गेंदबाजी किया करते थे।
क्रिकेट को लेकर नाना पाटेकर की दीवानगी ऐसी थी कि भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबलों के दौरान वह टीवी स्क्रीन से चिपके रहते थे। उम्र बढ़ने के साथ भी उनका यह शौक कम नहीं हुआ। टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली उनके सबसे पसंदीदा खिलाड़ी थे।
नाना ने एक बार कहा था कि अगर विराट कोहली मैच में जल्दी आउट हो जाते हैं, तो उनका खाना खाने का मन ही नहीं करता। उनका यह बयान जनवरी 2025 में सोशल मीडिया पर तब खूब वायरल हुआ था, जब विराट के जल्दी आउट होने पर फैंस ने नाना पाटेकर के इस बयान को जोड़कर मजेदार मीम्स शेयर किए थे।
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए नाना पाटेकर ने बताया था कि, बचपन में मैं एक ऑफ-स्पिन बॉलर था। चूंकि उस वक्त मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और मेरी जेब में क्रिकेट सीखने के लिए पैसे नहीं होते थे, इसलिए मैं मुंबई के मशहूर शिवाजी पार्क चला जाता था। वहां जो लोग नेट प्रैक्टिस कर रहे होते थे, मैं उनके लिए गेंदबाजी करता था। नाना के अंदर एक ऐसा जुनूनी क्रिकेटर बसता था कि उन्होंने उस इंटरव्यू में दावा भी किया था कि अगर उन्हें सिर्फ 10 दिन की प्रैक्टिस मिल जाए, तो वह आज भी बेहतरीन बॉलिंग कर सकते हैं।
नाना पाटेकर हमेशा क्रिकेट और सिनेमा के बीच एक खास समानता देखते थे। उनका मानना था कि दोनों ही क्षेत्रों में परीक्षा जैसी स्थिति होती है। उन्होंने कहा था कि एक क्रिकेटर का खेल मैदान पर पांच दिन तक टेस्ट मैच में चलता है, जबकि एक कलाकार का काम फिल्म के लिए डेढ़ से दो साल तक चल सकता है, लेकिन दोनों ही मामलों में आखिरी फैसला दर्शक ही करती है।
अपनी दमदार डायलॉग डिलीवरी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन सिनेमा और खेल के प्रति उनका यह अनोखा जुनून हमेशा याद किया जाएगा।