25 करोड़ की चोट! कैमरून ग्रीन के कारण KKR का बिगड़ा गणित, अब वर्कलोड मैनेजमेंट पर छिड़ी बहस

IPL 2026: आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन में केकेआर ने कैमरून ग्रीन को 25.20 करोड़ में खरीदा, लेकिन वह अब तक एक भी ओवर नहीं फेंक सके हैं, हालांकि नेट्स में गेंदबाजी करते नजर आए हैं।
Cameron Green
कैमरून ग्रीन (फोटो- सोशल मीडिया)
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Sunil Gavaskar Appel To BCCI:  आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम मुश्किल दौर से गुजर रही है। अब तक जीत का खाता नहीं खोल पाने के बावजूद टीम की रणनीति, प्लेइंग इलेवन या कप्तान अजिंक्य रहाणे के फैसलों पर ज्यादा सवाल नहीं उठ रहे हैं। खासकर उस मैच में पहले बल्लेबाजी का निर्णय, जहां बारिश की पूरी संभावना थी, चर्चा का विषय होना चाहिए था। इसके बावजूद आलोचना का केंद्र ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन बने हुए हैं।

कैमरून ग्रीन की आलोचना कितनी जायज?

ग्रीन ने किसी भी फ्रेंचाइजी से मोटी रकम की मांग नहीं की थी। उन्होंने तो सिर्फ 2 करोड़ रुपये की बेस प्राइस पर खुद को रजिस्टर किया था, जैसा अन्य खिलाड़ियों ने भी किया। इसके बावजूद 25.20 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के बाद से ही वह लगातार निशाने पर हैं। उनकी कीमत को आधार बनाकर की जा रही आलोचना काफी हद तक बेबुनियाद नजर आती है।

फॉर्म और प्रदर्शन पर उठते सवाल

आईपीएल 2026 से पहले ही ग्रीन की फॉर्म चिंता का विषय रही है। ऑस्ट्रेलिया टीम में उनकी जगह को लेकर सवाल उठ रहे थे। एशेज और टी20 वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। एक ऑलराउंडर के तौर पर उनसे बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन फिलहाल न बल्लेबाजी और न ही गेंदबाजी में वह पुरानी धार दिखा पाए हैं।

गेंदबाजी को लेकर क्यों हो रहा हंगामा?

केकेआर की समस्याओं का ठीकरा ग्रीन की गेंदबाजी पर फोड़ा जा रहा है, जबकि वास्तविकता कुछ अलग है। उनकी बल्लेबाजी जरूर निराशाजनक रही है, लेकिन गेंदबाजी से मैच पलटने की उम्मीद कभी नहीं थी। हेड कोच अभिषेक नायर ने संकेत दिया था कि ग्रीन टीम में आंद्रे रसेल की भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन दोनों खिलाड़ियों की तुलना करना सही नहीं है। ग्रीन ने अपने टी20 करियर में औसतन प्रति मैच करीब 1.5 ओवर ही फेंके हैं, जबकि रसेल एक पूर्ण ऑलराउंडर हैं।

मामला तब और गरमाया जब भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि जो खिलाड़ी पूरी तरह फिट नहीं हैं या अपनी भूमिका नहीं निभा पा रहे, उन पर सख्त नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि फ्रेंचाइजियों को केवल सूचना देना काफी नहीं है, खिलाड़ियों को पूरी तरह प्रतिबद्ध होना चाहिए।

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