

Ayush Mhatre meet Sachin Tendulkar: जिम्बाब्वे की सरजमीं पर तिरंगा फहराने और इतिहास रचने के बाद भारतीय अंडर-19 टीम के कप्तान आयुष म्हात्रे स्वदेश लौट आए हैं। म्हात्रे की कप्तानी में युवा टीम इंडिया ने आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में इंग्लैंड को 100 रनों से करारी शिकस्त देकर रिकॉर्ड छठी बार खिताब पर कब्जा जमाया।
सोमवार को जब यह चैंपियन कप्तान मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा, तो नजारा देखने लायक था। ढोल-नगाड़ों और 'इंडिया-इंडिया' के नारों के बीच म्हात्रे का स्वागत उनके माता-पिता और प्रशंसकों ने किया।
स्वदेश वापसी के तुरंत बाद आयुष म्हात्रे के जीवन का सबसे बड़ा सपना तब सच हुआ, जब वे 'क्रिकेट के भगवान' कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर से मिलने उनके निवास स्थान पहुंचे। यह मुलाकात महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि एक युवा खिलाड़ी के लिए अपनी प्रेरणा से आशीर्वाद लेने का सुनहरा अवसर था। सचिन तेंदुलकर ने बड़े ही स्नेह के साथ आयुष का स्वागत किया और उन्हें विश्व कप की ऐतिहासिक जीत की बधाई दी।
इस मुलाकात का सबसे भावुक पल तब आया जब सचिन तेंदुलकर ने आयुष को अपनी वह टेस्ट जर्सी गिफ्ट की, जिसे उन्होंने अपने करियर की अंतिम टेस्ट सीरीज के दौरान पहना था। सचिन ने जर्सी पर अपने हस्ताक्षर किए और एक प्रेरणादायक संदेश लिखा: "प्रिय आयुष, तुम्हारे करियर के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।" 18 वर्षीय आयुष के लिए यह सम्मान किसी पदक से कम नहीं था। उन्होंने इस खास पल का वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया, जिसमें वे मास्टर ब्लास्टर से यह बेशकीमती तोहफा लेते हुए बेहद भावुक और खुश नजर आ रहे हैं।
वीडियो में सचिन तेंदुलकर आयुष को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सलाह देते हुए भी दिखाई दिए। सचिन ने कहा, "यह वही जर्सी है जिसे मैंने अपनी अंतिम टेस्ट सीरीज में पहना था। लगातार मेहनत करते रहो और हमेशा खेल पर ध्यान केंद्रित रखो।" सचिन ने युवा कप्तान को आगाह करते हुए यह भी कहा कि सफलता के साथ-साथ ध्यान भटकाने वाली चीजें (Distractions) भी बहुत होंगी, लेकिन एक खिलाड़ी को लोगों के बहकावे में न आकर सिर्फ अपने अभ्यास और एकाग्रता पर ध्यान देना चाहिए।
मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए आयुष म्हात्रे ने अपनी खुशी व्यक्त की और कैप्शन में एक दिल छू लेने वाली बात लिखी। उन्होंने लिखा, "सर, मैं आपको टीवी स्क्रीन पर देखते हुए बड़ा हुआ हूं। आज मैं आपके घर खड़ा हूं और आपकी महान यात्रा का एक हिस्सा अपने हाथों में थामे हुए हूं। इस सम्मान के लिए आपका धन्यवाद। मैं इसे उसी आदर के साथ संभालकर रखूंगा, जैसे आपने सालों तक भारतीय क्रिकेट को ऊंचाइयों पर पहुंचाया।"
आयुष म्हात्रे ने केवल अपनी कप्तानी से ही नहीं, बल्कि अपने बल्ले से भी इस वर्ल्ड कप में अमिट छाप छोड़ी है। नॉकआउट मुकाबलों में जब टीम को जरूरत थी, तब म्हात्रे ने सामने से आकर नेतृत्व किया।
पूरे टूर्नामेंट की बात करें तो आयुष ने 7 पारियों में 30.57 की औसत से कुल 214 रन बनाए और वे भारत की ओर से चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उनकी कप्तानी और धैर्य की सराहना आज पूरे क्रिकेट जगत में हो रही है।