गौतम गंभीर का बड़ा कदम, दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर की सख्त मांग; जानें किस बात पर भड़के कोच?

Indian Cricket Team के हेड कोच गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल केस दायर किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर उनकी आवाज और डीपफेक चेहरे का गलत इस्तेमाल कर छवि खराब की गई है।
गौतम गंभीर को आया गुस्सा! दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे टीम इंडिया के हेड कोच; जानें क्या है पूरा मामला
गौतम गंभीर (फोटो-सोशल मीडिया)
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Gautam Gambhir filed case in HC: टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने अपनी पहचान के कथित दुरुपयोग को लेकर कानूनी कदम उठाया है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल केस दायर कर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे फर्जी कंटेंट पर सख्त आपत्ति जताई है।

फर्जी वीडियो को लेकर बढ़ा विवाद

हाल के दिनों में गौतम गंभीर के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिनमें उनके चेहरे और आवाज का डीपफेक तकनीक से गलत इस्तेमाल किया गया। कुछ वीडियो में उन्हें ऐसे बयान देते हुए दिखाया गया, जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं। इतना ही नहीं, एक वीडियो में उनके हेड कोच पद से इस्तीफा देने का दावा भी किया गया, जिसने इस मामले को और गंभीर बना दिया। इन वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

बिना अनुमति बेचे जा रहे पोस्टर और प्रोडक्ट

मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर गौतम गंभीर की तस्वीरों का इस्तेमाल कर पोस्टर और अन्य सामान भी बेचे जा रहे हैं। खास बात यह है कि इसके लिए उनकी कोई अनुमति नहीं ली गई, जिससे उनकी छवि और अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

कई लोगों और प्लेटफॉर्म के खिलाफ केस

इस पूरे मामले में गौतम गंभीर की ओर से कई व्यक्तियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। उन्होंने इसको लेकर भारी हर्जाने की मांग भी की है। यह केस कॉपीराइट कानून, ट्रेडमार्क कानून और कमर्शियल कोर्ट एक्ट के तहत दायर किया गया है, जिससे साफ है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं।

पहचान के दुरुपयोग पर उठाई आवाज

गौतम गंभीर ने इस मामले को सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि कानून और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान का इस तरह गलत इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि "मेरी पहचान मेरा नाम, चेहरा और आवाज का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया है। यह सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि कानून और सम्मान का मुद्दा है।"

इस तरह यह मामला डिजिटल दौर में बढ़ते डीपफेक और पहचान के दुरुपयोग पर एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां एक बड़े खिलाड़ी ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता चुना है।

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