

Indian Olympic Association Award best athlete Asian Games: इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन यानी IOA ने हाल ही में संपन्न हुए 20वें एशियन गेम्स के बाद भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल की शुरुआत की है। एसोसिएशन ने एशियाई खेलों में देश का गौरव बढ़ाने वाले 2 सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को दो नए विशेष पुरस्कारों से सम्मानित करने का फैसला किया है।
खेल जगत की दो महान विभूतियों की याद में, IOA ने पहली बार महिला कैटेगरी के लिए जसपाल राणा अवॉर्ड और पुरुष कैटेगरी के लिए राजा रणधीर सिंह अवॉर्ड देने का ऐलान किया है।
गौरतलब है कि इसी साल की शुरुआत में भारतीय खेल इतिहास के इन दोनों दिग्गज निशानेबाजों का निधन हो गया था। ऐसे में खेल जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान और अनमोल विरासत को हमेशा जीवित रखने के लिए इन पुरस्कारों की स्थापना की गई है।
वहीं इस ऐतिहासिक पुरस्कार के पहले विजेताओं के रूप में तीरंदाज कुमकुम मोहोद और पहलवान सुजीत कलकल को चुना गया है, जिन्हें जल्द ही एक भव्य समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
महज 17 साल की तीरंदाज कुमकुम मोहोद ने अपने डेब्यू एशियन गेम्स में ही वह कारनामा कर दिखाया, जिसने भारतीय तीरंदाजी के इतिहास को बदल कर रख दिया। कुमकुम ने इस मेगा इवेंट में कुल तीन पदक जीते, जिनमें दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल शामिल है।
कुमकुम ने अंकिता भक्त और कीर्ति के साथ मिलकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारतीय महिला टीम ने दक्षिण कोरिया के उस दबदबे को खत्म कर दिया, जो 1998 बैंकॉक एशियाई खेलों से लगातार 7 खिताब जीतकर चला आ रहा था।
इसके बाद कुमकुम ने अपनी सुनहरा फॉर्म जारी रखते हुए व्यक्तिगत स्पर्धा में भी गोल्ड मेडल पर कब्जा किया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि एशियाई खेलों के इतिहास में पहली बार दक्षिण कोरियाई महिला टीम रिकर्व के व्यक्तिगत गोल्ड से महरूम रह जाए।
इस व्यक्तिगत गोल्ड मेडल की बदौलत भारत ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए एक महत्वपूर्ण कोटा स्थान भी सुरक्षित कर लिया है। इसके अलावा, उन्होंने रिकर्व मिक्स्ड टीम स्पर्धा में देश को सिल्वर मेडल भी दिलाया।
आईओए की अध्यक्ष पीटी उषा ने कुमकुम की इस अविश्वसनीय सफलता की तारीफ करते हुए कहा कि कुमकुम का जसपाल राणा पुरस्कार की पहली विजेता बनना पूरी तरह न्यायसंगत है। जसपाल ने भी 1994 के एशियाई खेलों में एक युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी के रूप में अपने करियर का धमाकेदार आगाज किया था।
आईओए की अध्यक्ष ने कहा कि दबाव के क्षणों में कुमकुम का धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता भारतीय तीरंदाजी के उज्जवल भविष्य की ओर इशारा करती है।
दूसरी ओर, 23 वर्षीय युवा पहलवान सुजीत कलकल को पुरुषों के 65 किग्रा कुश्ती वर्ग में उनके हैरतअंगेज और जुझारू प्रदर्शन के लिए राजा रणधीर सिंह अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। सुजीत ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के सफर के दौरान दुनिया के दिग्गज पहलवानों को धूल चटाई।
सेमीफाइनल मुकाबले में सुजीत का सामना जापान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका से हुआ, जिन्हें उन्होंने मात देकर फाइनल का टिकट कटाया। इसके बाद गोल्ड मेडल मैच में उनका मुकाबला ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदियेव से हुआ।
यह मैच कुश्ती के इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक रहा। मैच के दौरान सुजीत एक समय 2-9 से पीछे चल रहे थे और समय बहुत तेजी से बीत रहा था। हार तय लग रही थी, लेकिन सुजीत ने हार नहीं मानी और आखिरी के पलों में अविश्वसनीय रूप से पलटवार करते हुए मुकाबला 10-9 से अपने नाम कर देश को गोल्ड मेडल दिलाया।
भारतीय खेलों के इतिहास में जसपाल राणा और राजा रणधीर सिंह का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। दोनों महान दिग्गजों का इस साल क्रमशः जून और मई में निधन हो गया था।
जसपाल राणा चार एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल आठ पदक जीते, जिनमें चार गोल्ड मेडल शामिल थे। वह भारत की दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के कोच भी रहे हालांकि मनु भाकर इस बार एशियन गेम्स में कोई पदक नहीं जीत सकीं।
एशियन गेम्स में भारत के लिए चार पदक जीते, जिसमें एक ऐतिहासिक गोल्ड मेडल शामिल था। खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद, उन्होंने एक कुशल स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में भी खेल जगत की लंबी सेवा की।
आईओए द्वारा शुरू किए गए ये दोनों अवॉर्ड्स न केवल इन दिग्गजों को सच्ची श्रद्धांजलि हैं, बल्कि उभरते हुए युवा खिलाड़ियों के लिए भविष्य में और बेहतर करने का एक बड़ा प्रोत्साहन भी बनेंगे।
जापान के नागोया में आयोजित हुए 20वें एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल ने कुल 85 मेडल जीतकर मेडल तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारत के कुल पदकों में 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे, जो देश की खेल प्रतिभा की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं।