

Neeru Dhanda Won Gold Medal in Asian Games 2026: भारत की नीरू धांडा ने महिलाओं के ट्रैप शूटिंग इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। एशियाई गेम्स 2026 में यह भारत का पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल है। नीरू के इस स्वर्ण पदक के साथ ही भारत के गोल्ड मेडल की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
नीरू धांडा एशियाई गेम्स के महिलाओं के ट्रैप इवेंट में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बन गई हैं। उनकी यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी और रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गई है।
नीरू धांडा ने मंगलवार को भारत को दोहरी खुशी दी। सुबह पहले उन्होंने टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता, वहीं, इसके बाद महिलाओं के ट्रैप शूटिंग इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर पहली भारतीय महिला शूटर बन गई हैं।
टीम स्पर्धा में नीरू धांडा (118), आशिमा अहलावत (106) और मनीषा कीर (104) ने कुल 328 अंक जुटाए और दूसरे स्थान पर रही। वहीं, चीन की टीम 346 अंकों के साथ गोल्ड मेडल जीतकर टॉप पर रही। हालांकि, नीरू धांडा इंडिविजुअल फाइनल के लिए भी क्वालीफाई कर गई थी। फाइनल में नीरू ने कमाल का प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल अपने नाम किया। व्यक्तिगत स्पर्धा में आशिमा अहलावत 16वें और मनीषा कीर 23वें स्थान पर रहीं।
द्रौपदी मुर्मू ने नीरू की जीत पर उन्हें बधाई दी। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि, आइची-नागोया में तिरंगा लहराते देखना बहुत गर्व की बात है, क्योंकि नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला इंडिविजुअल गोल्ड मेडल जीता है। विमेंस ट्रैप इंडिविजुअल इवेंट में आपकी ऐतिहासिक जीत और नया एशियन रिकॉर्ड बनाने पर आपको मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। उम्मीद है यह सुनहरा पल और भी कई युवा भारतीयों को शूटिंग में शामिल होने और बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।
नीरू धांडा एक मिडिल-क्लास परिवार से आती हैं। उनके पिता किसान हैं, जबकि उनकी मां हाउसवाइफ हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि नीरू आसानी से शूटिंग को अपना करियर बना पातीं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके भाई और कजिन ने शूटिंग के सफर में उनकी काफी मदद की। उनके भाई लक्ष्य खुद 2018 एशियन गेम्स में इंडिविजुअल सिल्वर मेडल जीत चुके हैं।
नीरू ने बताया कि ट्रेनिंग के शुरुआती दौर में उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, जो उनके सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी। ऐसे में उन्हें अपनी ट्रेनिंग पर और ज्यादा फोकस करना पड़ा।
नीरू अपने भाई लक्ष्य और कजिन लक्षेश्वरन की वजह से शूटिंग के खेल से जुड़ीं। ट्रेनिंग के दौरान वह करीब 6-7 महीने तक उनके घर पर रहकर शूटिंग की तैयारी करती रहीं। इसके बाद उन्होंने भोपाल शूटिंग एकेडमी में ट्रायल दिया, जहां उनका चयन हो गया। नीरू को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक साइकल की शुरुआत के साथ ही उन्हें शॉटगन शूटिंग में भारत की प्रमुख मेडल उम्मीदों में से एक माना जा रहा है।