Navabharat Nishanebaaz: विजय जानना चाहते स्टालिन का पता, उदयनिधि से पूछा-कहां हैं तुम्हारे पिता

Vijay Stalin Assembly Remarks: तमिलनाडु विधानसभा में विजय की एमके स्टालिन की गैरमौजूदगी पर टिप्पणी और उसके जवाब में स्टालिन की प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक तंज और बयानबाजी चर्चा में है।
Navabharat Nishanebaaz: Vijay wants to know Stalin's whereabouts; asks Udhayanidhi, "Where is your father?"
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Tamil Nadu Political Row: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को बड़ी फिक्र है कि पूर्व मुख्यमंत्री व डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन कहां हैं। उन्होंने विधानसभा में स्टालिन की गैरमौजूदगी पर टिप्पणी करते हुए उदयनिधि से पूछा कि आपके पिता कहां हैं। वे हमें दिखाई नहीं देते। विजय का यह सवाल क्या जले पर नमक छिड़कने जैसा नहीं है!'

हमने कहा, 'इस तरह की पूछ-परख के पीछे आत्मीयता भी तो हो सकती है। विजय का आशय हो सकता है छुपनेवाले सामने आ, छुप-छुप के मेरा जी ना जला, सूरज से किरण, बादल से पवन कब तलक छुपेगी ये तो बता !'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, स्टालिन सदन में नहीं आए, इसका यह मतलब नहीं कि वह कहीं छुपे हैं। एक कार्यक्रम में स्टालिन ने विजय को जवाब देते हुए कहा कि में विधानसभा में रहूं या न रहूं, मैं लोगों के दिलों में बसा हुआ हूं।'

हमने कहा, 'जहां तक छुपने की बात है, उस पर कितने ही फिल्मी गीत हैं जैसे कि छुप गया कोई रे दूर से पुकार के, दर्द अनोखे हाय दे गया प्यार के! छुपा लो यूं दिल में प्यार मेरा जैसे मंदिर में हो लौ दिए की!'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, किसी से उसके पिता की कुशलक्षेम या खैरियत पूछना गुनाह नहीं है।लोग उर्दू में किसी बच्चे से पूछते हैं-बरखुरदार, तुम्हारे बुजुर्गवार नजर नहीं आते। कहीं उनकी तबीयत नासाज तो नहीं है?'

हमने कहा, 'चुनाव में डीएमके को हराने से थालापति विजय को तसल्ली नहीं हुई। वह विपक्ष के नेता के रूप में स्टालिन को अपने सामने देखना चाहते हैं। आपने गीत सुना होगा-दुश्मन-दुश्मन जो दोस्तों से प्यारा है!'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, उदयनिधि के लिए विजय का टोन कुछ इस प्रकार का था-बाप बता, नहीं तो श्राद्ध कर! यदि स्टालिन चाहते तो वह बिग बी की शैली में जवाब दे सकते थे रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है शहंशाह!'

हमने कहा, 'जब बाप के जूते में बेटे का पैर आ जाता है तो वह बच्चा नहीं रहता। उदद्यनिधि मुख्यमंत्री को जवाब दे सकते थे कि पहले मुझसे तो निपट लो, मेरे बाप की बात बाद में करना!'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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